कोरकोट्टी
सब कुछ भूल सकता हूँ पर ये नाम नहीं भूल सकता कभी।
अविभाजित राजनांदगाँव में घटित ऐसी कोई नक्सल घटना नहीं, जिसके होने के बाद वहाँ न पहुंचा होऊं। संसदीय क्षेत्र की हर नक्सल घटना का कव्हरेज मैंने किया है। कई वीर जवानों की शहादत देखी है। पर कोरकोट्टी??? इस गाँव में 12 जुलाई 2009 को हुए खूनी मंजर का मैं प्रत्यक्ष गवाह हूँ। उस दिन नक्सलियों ने कोरकोट्टी में जो कुछ किया, उसे करीब से देखा है मैंने। प्रत्यक्षदर्शी इसलिए क्योंकि यह घटना होगी, इसका घटना होने के कुछ घंटो पहले तक किसी को अनुमान भी नहीं था।
12 जुलाई 2009 की तड़के नक्सलियों ने मदनवाडा़ कैम्प के दो जवानों को तब गोली मारी, जब वो शौच के लिए गए थे। इस घटना की खबर मिलने के बाद मैं, मेरे साथी पत्रकार कमलेश सिमनकर और दूरदर्शन के रिपोर्टर भाई परमानंद रजक के पुत्र युवा पत्रकार लोकेश रजक के साथ मानपुर और मदनवाडा़ के लिए रवाना हुआ। तब तक हममें से किसी को नहीं पता था कि मदनवाडा़ में नक्सलियों ने जो किया, वो सिर्फ एक ट्रेलर था, नक्सलियों ने कुछ बडा़ करने की तैयारी कर रखी थी। 12 जुलाई 2009 की उस रविवार की सुबह अपने दो जवानों की शहादत की खबर मिलने के बाद राजनांदगाँव के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे खुद घटनास्थल के लिए निकले और नक्सलियों ने मानपुर से कुछ ही दूर कोरकोट्टी में राजनांदगाँव जिले के इतिहास का सबसे बडा़ खूनी खेल खेल दिया।
नक्सलियों ने राजनांदगाँव के एसपी विनोद कुमार चौबे के साथ निरीक्षक विनोद ध्रुव, उप निरीक्षक धनेश साहू, उप निरीक्षक कोमल साहू, प्रधान आरक्षक गीता भंडारी, प्रधान आरक्षक संजय यादव, प्रधान आरक्षक जखरियस खलखो, आरक्षक रजनीकांत, आरक्षक लालबहादुर नाग, आरक्षक निकेश यादव, आरक्षक वेदप्रकाश यादव, आरक्षक श्यामलाल भोई, आरक्षक बेदूराम सूर्यवंशी, आरक्षक लोकेश छेदैया, आरक्षक अजय भारव्दाज, आरक्षक सुभाष बेहरा, आरक्षक रितेश देशमुख, आरक्षक मनोज वर्मा, आरक्षक अमित नायक, आरक्षक टिकेश्वर देखमुख, आरक्षक मिथलेश साहू, आरक्षक प्रकाश वर्मा, आरक्षक सूर्यपाल वट्टी, आरक्षक झाडूराम वर्मा, आरक्षक संतराम साहू और सातवीं वाहिनी सीएएफ भिलाई के दो प्रधान आरक्षक दुष्यंत राठौर और सुंदरलाल चौधरी को अपना निशाना बना लिया और सभी की शहादत हो गई। पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे सहित अधिकांश जवान मानपुर के नजदीक कोरकोट्टी में शहीद हुए थे और उनके शव उसी दिन जिला मुख्यालय ला लिए गए थे। उनके साथ मदनवाडा़ में शहीद हुए सीएएफ भिलाई के दो प्रधान आरक्षकों दुष्यन्त राठौर और सुंदरलाल चौधरी के शव भी उसी दिन ले आया गया जबकि सीतागांव में रोड ओपनिंग में जुटे सीतागांव कैम्प में पदस्थ उप निरीक्षक धनेश साहू और प्रधान आरक्षक गीताराम भंडारी के शव दूसरे दिन लाए जा सके!
आम तौर पर जून के अंत और जुलाई की शुरूआत से शुरू हो जाने वाला बारिश का दौर उस वर्ष 12 जुलाई तक शांत रहा और एक बूंद पानी नहीं बरसा। और फिर 13 जुलाई को सुबह से बारिश का दौर जो शुरू हुआ तो उसने रूकने का नाम नहीं लिया। उस दिन ऐसा लग रहा था मानों आसमान से बारिश भी बरस कर शहादत को सलाम कर रही हो।
शहीद एसपी चौबे और जवानों की शहादत को सलाम करने राजनांदगांव के ठाकुर प्यारेलाल चौक में शहीद एसपी विनोद कुमार चौबे की मूर्ति की स्थापना की गई है और शहीद जवानों की नाम पट्टिका लगाई गई है।
उस घटना को 17 साल हो गए हैं, पर अभी भी लगता है मानों कल की ही बात हो। अब राजनांदगाँव से अलग होकर नए बन चुके जिले मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी के जिस कोरकोट्टी गाँव में जवानों की शहादत हुई थी, उसी कोरकोट्टी गाँव के नाम से मैं अपनी तीसरी किताब "कोरकोट्टी" लेकर आ रहा हूँ और 12 जुलाई 2026 की सुबह शहीद जवानों के परिजनों के हाथों इस किताब का विमोचन होना है।
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