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14 सितंबर 2012

सिर्फ महंगाई का बढना नहीं है यह.....

 सरकार ने आखिरकार डीजल के दाम बढ़ा दिए। संभवत: मई 2011 के बाद पहली बार डीजल के दाम बढे हैं। एक मुश्त पांच रूपए। इससे पहले पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ते रहे हैं। इस सरकार के काबिज होने के बाद से करीब 13 दफा। रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भी परिवर्तन हुआ है लेकिन उपभोक्ता पर तब ज्यादा भार पड़ेगा जब वह साल भर में छह से ज्यादा सिलेंडर उपयोग करे। छह सिलेंडर तक वही पुरानी कीमत यानि 420 रूपए चुकानी पड़ेगी और इसके बाद के सिलेंडर के लिए 747 रूपए देने होंगे। ये दोनों है तो वैसे महंगाई बढऩे की खबरें। सामान्य तौर पर यही चर्चा की जा रही है और इसी बात को लेकर सरकार को कोसने का काम हो रहा है, पर पिछले दिनों आई एक खबर को इस खबर के साथ जोड़कर हम देख रहे हैं और यह एक तरह से भारतीय संस्कृति, भारतीयता की ताकत पर हमले की तरह है।
कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि भारत सरकार का महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय इस बात पर विचार कर रहा है कि महिलाओं को अपने पति की कमाई में से एक हिस्सा हर माह मिले। यानि कि पति अपनी कमाई से दस या बीस फीसदी पत्नी को दे। अब तक होता यह आया है कि (जैसा कि हर भारतीय परिवार में परंपरा है) पति अपनी पूरी पगार सीधे अपनी पत्नी के हाथों में दे देता है और पत्नी घर का खर्चा चलाती है लेकिन सरकार पत्नियों को घर की मालकिन से सीधे कर्मचारी बनाने पर विचार कर रही है। इस मंत्रालय के प्रस्ताव में भी ऐसा ही जिक्र है कि पति अपनी पत्नियों को परिवार के लिए किए कामों की कीमत दे। सरकार का तर्क है कि यह प्रस्ताव महिलाओं को, गृहणियों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा लेकिन हमारा सोचना है कि ऐसा कर सरकार एक पत्नी, जिसे भारतीय परंपरा में अर्धांगिनी कहा जाता है, को महज वेतन के लिए परिवार के लोगों का ख्याल रखने वाला बनाना चाहती है।
अब रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फेरबदल पर बात की जाए तो यह भी संयुक्त परिवार पर हमले की तरह है। एक साल में छह सिलेंडर से उन घरों में आसानी से काम निकल सकता है जो संयुक्त परिवार से अलग रहते हैं। पति, पत्नी और एक या दो बच्चों वाले परिवार में एक सिलेंडर डेढ़ से दो महीने आसानी से चल जाता है यानि इस परिवार के लिए साल में छह सब्सिडी वाले सिलेंडर पर्याप्त हैं। पर संयुक्त परिवार जहां माता पिता, एक से ज्यादा भाईयों का परिवार एक साथ रहता है, वहां एक सिलेंडर महीने भर या पखवाड़ा भर चल जाए तो बड़ी बात है। यानि कि यहां चौथे महीने के बाद ही सिलेंडर 747 रूपए में लेने पड़ेंगे। इससे बचने ये परिवार कागजों में खुद को अलग दिखाएंगे और अलग अगल भाई अलग अलग रसोई दर्शाकर सिलेंडर लेंगे। कुछ रूपए बचाने कागजों में अलग हुआ संयुक्त परिवार आने वाले वक्त में दिल से भी जुदा हो जाए तो आश्चर्य नहीं।
मेरा मानना है कि सरकार ने पेट्रोल, डीजल, रसाई गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी कर आम आदमी को तो महंगाई की आग में झुलसाने का काम किया ही है, इस बहाने भारतीय परंपरा, भारतीय संस्कृति को भी चोट करने का काम किया गया है, जिसका असर आने वाले समय में दिखेगा। सरकार को यदि घाटे की ही चिंता है तो उसे सब्सिडी का खेल बंद कर देना चाहिए और पहला सिलेंडर ही सीधे 747 रूपए में मिले, यह आदेश जारी करना चाहिए, इससे उसकी नीयत में खोट भी नहीं नजर आएगी और भेदभाव का भाव भी लोगों में नहीं रहेगा। वरना संयुक्त परिवार और आदर्श व्यवस्था की जो मिसाल भारत में मौजूदा समय में है, वह सिर्फ किताबों में दर्ज हो जाएगी और इसके लिए इतिहास इस सरकार को कभी माफ नहीं करेगा।