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28 अगस्त 2012

कमीनेपन का एक और नमूना

पाकिस्तान में  हिंदू परिवार कितनी जिल्लत से जी रहे हैं, यह खबर पढ़कर मन में गुस्सा भर गया और कोफ्त हुई कि बंटवारे के इतने साल बाद भी पाकिस्तान के मन का जहर नहीं उतरा है। बंटवारे का जितना दर्द,  जितनी पीड़ा और जितनी तकलीफें हमने (भारत ने) देखी हैं, उसके सामने पाकिस्तान की तकलीफें कुछ भी नहीं। उस समय के हुक्मरानों ने पाकिस्तान को तश्तरी में सजाकर दे दिया और भारत का विभाजन हो गया। उस समय के लोगों की अदूरदर्शिता ही थी कि उन्होंने सोचा था,  बंटवारे के बाद दोनों ओर अमन चैन कायम रहेगा लेकिन जिस तरह से घर को बांटकर अलग किया गया था, पाकिस्तान का कमीनापन और दोगलपन अब तक जारी है और वह न अपने देश में रह रहे हिंदूओं को चैन से जीने दे रहा है और न ही भारत की शांति को कायम रहने दे रहा है।
आतंकवाद को पनाह देने वाले देश में पाकिस्तान अव्वल नम्बर पर है और उस देश के लोग भारत में होने वाले हर आतंकी हमले में शामिल पाए जा रहे हैं। चाहे वह मुंबई का पूर्व का हमला हो, चाहे मुंबई में ताजा हमले हों। दिल्ली में संसद पर हमले की बात हो या फिर पुणे या भारत के किसी भी अन्य शहर की बात हो। पाकिस्तानी हाथ नजर आ ही जा रहा है। सीमा पर युद्धविराम की स्थिति है,  लेकिन पाकिस्तान इसका उल्लंघन लगातार कर रहा है। पखवाड़े भर में ही उसने करीब 18 बार सीमा पर गोलीबारी की है। यानि उसका मकसद सीमा पर अशांति फैलाना ही है। सीमा पर पुंछ के पास पाकिस्तान की ओर से सुरंग भी तैयार कर डाली गई। पिछले दिनों इसे इसे भी पकड़ा गया।
ये तो हुई पुरानी बातें। ताजा खबर पर बात करें तो पाकिस्तान से एक चौंकाने वाली और गुस्से में भर देने वाली खबर आई है। पाकिस्तान में बंटवारे के इतने साल बीतने के बाद भी वहां अपना आशियाना तलाशने की आस में गए भारतीय जिल्लत की जिंदगी बसर करने मजबूर हैं। वहां हिंदूओं को हिकारत की नजर से देखा जाता है और उन पर तरह-तरह के अत्याचार किए जाते हैं। वे अब भी पाकिस्तानी निवासी नहीं कहलाते, मुहाजिर कहलाते हैं। उनके साथ सामाजिक भेदभाव किया जाता है। जबरन धर्मांतरण किया जाता है और हिंदू लड़कियों का जबरन निकाह करा दिया जाता है।
स्थिति इतनी विकट है कि जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच किसी प्रकार का खेल होता है, चाहे वह हॉकी हो या क्रिकेट। यदि उस मैच में पाकिस्तान की टीम हार जाए तो उसका गुस्सा पाकिस्तानी लोग वहां रह रहे हिंदूओं पर निकालते हैं और उन्हें प्रताडि़त करते हैं। वहां रह रहे हिंदू परिवार अब यह दुआ करने लगे हैं कि भारत पाकिस्तान के बीच किसी प्रकार का खेल रिश्ता न रहे, क्योंकि इसके बाद उनका जीवन नरक बन जाता है।
बड़ी चिंता की बात है। हमारे देश में बैठे नीति निर्धारकों को यह सोचना चाहिए और खेल के माध्यम से दोनों देशों के बीच रिश्तों की गुंजाईश पर फिर से मंथन करना चाहिए।  पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार का रिश्ता नहीं करना चाहिए। खेल का भी नहीं। क्योंकि किसी भी दोगले इंसान के साथ रिश्ता रखने पर नुकसान अपना ही होता है। खेल के माध्यम से रिश्तों बनाने की हिमायत रखने वालों पर यह करारा तमाचा है। भले ही वो पाकिस्तान में रह रहे हों, पर हिंदू परिवार हैं। हिंदूस्तान से गए हुए हैं। उनके साथ इस तरह का बर्ताव करने वाले किसी भी कमीने देश के साथ रिश्ता रखने की सोचना हमारी नजर में उनकी हरकतों पर परदा डालने जैसा ही है।