14 फ़रवरी 2011

मुहब्‍बत...


' कल तुम्‍हारी आवाज शहर में आई थी,
कल चांद दिखा था,
लोगों को लगा कि ईद थी कल,
कैसे बताऊं जमाने को कि वो तुम्‍हारा चेहरा था...’
ये हद है किसी को चाहने की। जहां सारे बंधन, सारी सीमाएं अपना अस्तित्‍व खो देते हैं। कौन कहता है कि दुनिया ‘मैं’ की ख्‍वाहिश में सारी उम्र का सौदा कर लेती है। जब भी किसी दिल में प्‍यार पलने लगता है, उसका सब कुछ ‘तुम’ पर न्‍यौछावर हो जाता है। हर सांस उस नाम को लिख दी जाती है। हर सपना उसका होता है। हर चाहत उसके ख्‍याल तक आकर रूक जाती है। जीवन की सारी परिभाषा उसके नाम के हर्फों में पूरी हो जाती है।
ये इश्‍क है। खुदा की तरह पाक। ये मुहब्‍बत है। ईश्‍वर के नाम की तरह पवित्र। फसाने लिखे गए हैं, प्‍यार करने वालों पर गुजरे वक्‍त में। इतिहास लिखा जाएगा कल की‍ फिजा में, आज जिक्र है जिनकी चाहत का जमाने में। गर सवाल कभी दिल में उठे कि मजनू पागल क्‍यो हो गया था तो लैला बनकर सोचो। जवाब भीगी आंखों में सिसकती रातों में मिल जाएगा।
रोने के कई मौसम आते हैं। जिंदगी में कभी कभी ही तो हंसना मयस्‍सर होता है, उस रोने के मौसम को बुलाने के लिए। आज की मुलाकात की खुशी से जो आखें चमक रही हैं, कल धुआं होगा इनमें। आज जो हंसी की खनक गूंजी है, कल होठों पर कंपन होगा। अकेले होंगे हम और तुम, आंसुओं की गरमी और जहां से फना हो जाने जैसी बर्फ सी ठंडी सोच के साथ। ... लेकिन अफसोस न करना, मुहब्‍बत रूसवा हो जाएगी। जमाने से मत लडना, इश्‍क की तौहीन होगी। क्‍या हुआ जो तुम्‍हे जमाने ने उसका हमदम नहीं माना। ये क्‍या कम है कि उसकी चाहत, उसका नाम, उसकी हर सोच तुम तक आकर रूक जाती है।
जब भी इश्‍क करना कभी रश्‍क न लाना दिल में। जब भी जिंदगी को किसी के नाम लिखना, वसीयत के कागजात न बदलवाना। प्‍यार ने कब सीखा है लेना। देने के लिए ही जिंदगी की घडिया कम होंगी।
(मेरी डायरी में कई बरस पहले नोट किए गए ये शब्‍द इस प्रेम दिवस पर पेश है) 
वेलेन्‍टाईन डे

44 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह ....
    दो पंक्तिया याद आ गयी एक ग़ज़ल की आप की इस अनुभूति पर
    मुहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का..
    उसी को देख कर जीते है जिस काफ़िल पे दम निकले...

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  2. अच्छा लिखा है, ! हार्दिक शुभकामनायें

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  3. वाह
    सार्थक सन्देश देती रचना. आभार.

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  4. आपको हेप्पी वेलन्टाईन डे की हार्दिक शुभकामनायें ...स्वीकार करें

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  5. प्यार में लिखी गयी इससे बेहतर पंक्तियाँ कभी नहीं पढ़ीं पहले । खुशनसीब होगी वो लड़की जिसके लिए आपने ये लिखा होगा।

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  6. बहुत सुन्दर भाव और उनकी अभिव्यक्ति..

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  7. सुंदर भावनात्मक प्रस्तुति. आभार .

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  8. अच्छा लिखा है, ! हार्दिक शुभकामनायें

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  9. प्रेमदिवस की शुभकामनाये !
    कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
    माफ़ी चाहता हूँ

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  10. शब्दों और चित्र दोनों ही स्थान पर प्रेम अपने चरम पर है ! ज़ज्बाती प्रस्तुति ! बेहतर प्रस्तुति ! भाई स्वराज्य करुण और सतीश सक्सेना की स्वीकृति के बाद इस विषय में कोई संशय शेष नहीं !

    अशेष शुभकामनायें !

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  11. अतुल जी,

    खलील जिब्रान पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया.......बहुत ही खुबसूरत अहसास है आपके जिन्हें आपने खुबसूरत अल्फाजों से बयां किया है .....बहुत खूब|

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  12. प्रिय बंधुवर अतुल जी
    सस्नेहाभिवादन !
    बहुत अच्छा लिखा … डायरी में कई बरस पहले नोट किए गए भाव हमसे बांटने के लिए शुक्रिया !

    आपको मेरी एक ग़ज़ल के तीन शे'र समर्पित हैं -
    मैं गीत निश्छल प्रीत के अविराम लिक्खूंगा
    हर इक चरण में बस तुम्हारा नाम लिक्खूंगा
    आंसू प्रतीक्षा विरह का इतिहास बदलूंगा
    मैं प्रीत का सुखकर मधुर परिणाम लिक्खूंगा
    नवनीत घट बंशी विटप झूले नहीं तो क्या
    राधा तुम्हें और मैं स्वयं को श्याम लिक्खूंगा


    प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !
    ♥ प्रणय दिवस की मंगलकामनाएं! :)

    बसंत ॠतु की भी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  13. जब भी इश्‍क करना कभी रश्‍क न लाना दिल में। जब भी जिंदगी को किसी के नाम लिखना, वसीयत के कागजात न बदलवाना। प्‍यार ने कब सीखा है लेना । देने के लिए ही जिंदगी की घडिया कम होंगी |

    प्रेम को बहुत खूबसूरती से परिभाषित करती सुन्दर रचना |

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  14. प्रेम दिवस पर दिल से निकली हुई प्यार भरी खूबसूरत अभिव्यक्ति !

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  15. अतुल जी...आपका ब्लॉग और आपकी यह खूबसूरत रचना आज चर्चामंच पर है... आप चर्चा में अपने विचारों से अनुग्रहित कीजियेगा .... आपका सादर धन्यवाद
    http://charchamanch.blogspot.com

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  16. ये इश्क इश्क है इश्क इश्क...बेहतरीन लिखा है आपने वेलंटाइन डे पर...आपकी लेखनी प्रभावशाली है...

    नीरज

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  17. अतुल भाई मुहब्बत विषय पर इस पद्यात्मक गद्य प्रस्तुत के लिए विशेष बधाई स्वीकार करें| जय हो|

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  18. बहुत खूबसूरत बात लिखी है ...अद्भुत ..

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  19. accha likha hai.....meri rachna ki sarahna karne ke liye dhanyavad

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  20. बहुत प्रभावशाली,
    सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
    शुभकामनायें एवं साधुवाद !

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  21. सार्थक और सटीक लेखन ..आपका आभार

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  22. सही कहा आपने,
    प्यार में लेने का रिवाज नहीं है, केवल दिया जाता है।
    शुभकामनाएं।

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  23. सुन्दर सोच है आपकी. बधाई स्वीकारें.

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  24. सुन्दर प्रस्तुति, आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. कृपया संयुक्त परिवार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे.

    haish singh 07860754250



    http://allindiabloggersassociation.blogspot.com

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  25. मेरे पोस्‍ट को प्‍यार देने के लिए आप सब का शुक्रिया। सबका आभार।
    ऐसे ही सहयोग की उम्‍मीदों के साथ एक और नए पोस्‍ट के साथ हाजिर हूं।

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  26. कल तुम्‍हारी आवाज शहर में आई थी,
    कल चांद दिखा था,
    लोगों को लगा कि ईद थी कल,
    कैसे बताऊं जमाने को कि वो तुम्‍हारा चेहरा था...’

    kya khub kaha hai aapne, !
    aur haan aap hamare blog pe aaye, achchha laga, ummid karte hain sampark bana rahega..hamne follow bhi kiya..:)

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  27. bhot acha likha hai sir ji..
    प्यार, इश्क ,मोहोबत रख दिया नाम ,
    खुदा की इनायत का ,
    हर पहर जिसे शुरू और जिसपे ख़त्म होता है ,
    उससे एक दिन में समेट दिया है ,
    जिसको valentein-डे कहे दिया है ,
    ye kuch line jo humne v-day pe f.b pe post ki thi par blog par nhi,
    apki post dekh kar apni line yaad aagai jo apko post kardi,
    apka blog bhot acha hai...

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  28. जरूरी तो नहीं कुछ पाने की उम्मीद से प्यार किया जाए...
    वो अहसास ही बहुत है जिसे हम ख़ुशी कहते है...

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  29. कागज की कलम ,कलम कागज बन जाये ,
    पूरक हो जीवन प्यार पगा वैलेंटायीं के दिन आये

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  30. एकदम सही अतुल सर ,
    जब प्यार होता है तो मै से सब तुम पर न्योछावर हो जाता है
    यही प्यार है..
    प्रेमदीवस पर बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति....

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  31. बहुत सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति...

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