12 जुलाई 2011

वतन पर जो फिदा होगा अमर वो नौजवां होगा.........


शहीद श्री वीके चौबे और जवान(पूरे जवानों की तस्‍वीरें नहीं मिल पाईं)
नक्‍सलवाद का नासूर। न जाने कितने घरों को तबाह करेगा। कभी किसी मां की गोद सूनी होती है।  कभी किसी की मांग का सिंदूर मिट जाता है। कभी किसी बच्‍चे के सिर से उसके पिता का साया उठ जाता है तो कभी कोई बहन रक्षाबंधन के दिन हाथ में राखी लिए अपने भाई का इंतजार करती रह जाती है। यूं तो नक्‍सल शब्द आया पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्‍सलबाडी से। भाकपा नेता चारू मजूमदार और कानू सान्‍याल ने 1967 में सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की थी। सत्‍ता में परिवर्तन के लिए सशस्‍त्र क्रांति जरूरी है, ऐसे नारे के साथ 1967 में नक्सलबाड़ी में फूटी चिंगारी मौजूदा समय में  देश के 9 राज्यों के सामने सीधी चुनौती बनकर सामने है । अब नक्‍सलवाद का चेहरा बदल गया है। सत्‍ता परिवर्तन की इच्‍छा या व्‍यवस्‍था में बदलाव की ख्‍वाहिशें दफ्न हो गई हैं और नक्‍सली लूटेरों और हत्‍यारों के गिरोह में तब्‍दील हो गए हैं।
वैसे तो छत्‍तीसगढ, बिहार, आंध्रप्रदेश, महाराष्‍ट्र, उडीसा, पश्चिम बंगाल,  झारखंड, उत्‍तरप्रदेश और उत्‍तराखंड में नक्‍सलियों  ने कई वारदातों को  अंजाम देकर अपनी दरिंदगी का सबूत दिया है लेकिन एक घटना  है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, उसका जिक्र यहां करूंगा। छत्‍तीसगढ में सबसे बडी वारदात कर नक्‍सलियों ने पुलिस को सीधे चुनौती दी।
12 जुलाई 2009। रविवार का दिन। रविवार होने के कारण देर तक सोने की चाह थी पर सुबह छह बजे फोन की घंटी ने उठा दिया। पहली खबर मिली मानपुर (राजनांदगांव जिले का नक्‍सल प्रभावित इलाका) के मदनवाडा में नक्‍सलियों ने सुरक्षा बल के दो जवानों को गोली मार दी है। सबसे पहले यह खबर अपने चैनल में ब्रेक की। इसके बाद बिस्‍तर से उठा और तैयारी करने लगा मानपुर जाने की। शायद तब तक राजनांदगांव जिले के एसपी श्री वी के चौबे जो एक ऐसे अफसर थे जो किसी भी नक्‍सली वारदात होने पर मौके पर पहुंचकर जवानों की हौसला आफजाई करते थे, मानपुर के लिए कूच कर गए थे। बारिश का मौसम था सो टैक्‍सी काल की। टैक्‍सी आती तब तक मैं नहा धोकर तैयार हुआ। अपने लैपटाप को तैयार किया। कैमरा और बैटरी चेक की।  मोबाईल की बैटरी को देखा।  उस दिन शायद मेरा देर से निकलना लिखा था इसलिए जो टैक्‍सी वाला बुलाने के आधे घंटे में ही हाजिर हो जाता था डेढ घंटे  में पहुंचा। साथ में मैंने अपने सहयोगी को लिया और निकल पडा।  
घर से निकलकर टैक्‍सी में सवार हुआ ही था कि दूसरा फोन आया,  शहीदों का आंकडा  बढ सकता है। मन विचलित हुआ। फिर खबर को  अपडेट किया, चैनल में। सुबह आठ बजे पहला फोनो दिया। फोनो के लिए शहर में  ही रूका, कहीं रास्‍ते में नेटवर्क मिले न मिले। फोनो से निपटकर  जैसे ही गाडी आगे बढी एक और खबर मिली। एसपी श्री वीके चौबे की गाडी पर नक्‍सलियों ने फायरिंग कर दी है लेकिन एसपी नक्‍सलियों की गोलीबारी को पार कर सुरक्षित निकल गए हैं। चिंता और बढी। हम आगे बढते ही रहे। बीच बीच में खबर मिलती रही। इसके बाद सारी खबर अपुष्‍ट ही मिलती रही। सौ किलोमीटर का सफर तय कर मानपुर पहुंचे। मानपुर में पहुंचते ही खबर  मिली कि कुछ जवानों के शव अस्‍पताल में लाए जा चुके हैं। अस्‍पताल पहुंचने पर देखा अफरातफरी का माहौल था। अंदर जाकर देखा तो एक दो नहीं दस बारह जवानों के शव। बिस्‍तर कम था सो जमीन पर ही रख दिये गए थे। कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था। खबर बडी होती जा रही थी।
करीब 12 बज  गए होंगे। फिर से चैनल में खबर अपडेट की। लैपटाप औ  इवीडीओ की मदद से अब प्रारंभिक विजुअल्‍स भेजने के बाद घटनास्‍थल पर जाने की कोशिश की। इलेक्‍ट्रानिक मीडिया से मैं इकलौता पत्रकार था जो वहां पहुंचा था। घटनास्‍थल से कुछ पहले पुलिस के जवानों ने रोक दिया। यह कहकर कि आगे गोली चल रही है न जाएं। पर अपने रिस्‍क में हम आगे बढे। कुछ  दूर जाने के बाद गाडी छोडकर पैदल ही जाना पडा। आगे मिल गए, आईजी श्री मुकेश गुप्‍ता। उनसे बात करता उससे पहले एक पुलिस वाले ने मुझे गले लगा लिया, यह कहकर कि हर तरफ खून से सराबोर वर्दी..... तुम पहले व्‍यक्ति हो जिसे  देख रहा हूं यहां....  वरना ऐसी ही तस्‍वीरें.... उसने ही मुझे एक संकेत दिया कि शायद एसपी श्री वी के चौबे..........
डेढ बजे होंगे। मैं आगे बढा। जवानों के शव मौके से उठाकर ट्रेक्‍टर में डाले जा रहे थे। मुकेश गुप्‍ता साहब जो खुद कीचड से लथपथ थे, उन्‍हें देखकर लग रहा था कि जमकर  मुकाबला किया है उन्‍होंने भी नक्‍सलियों का..... लगातार निर्देश दिए जा रहे थे और आर आई  गुरजीत सिंह जवानों के शवों को मौके से उठाकर अस्‍पताल भिजवाने की व्‍यवस्‍था में लगे थे। मुकेश गुप्‍ता साहब से बात की। उन्‍होंने मौके पर ही बाईट देने में सहमति बताई। करीब 20 मिनट तक वो लगातार बोलते रहे। कहीं कहीं वो रूकते, जिससे यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता था कि कुछ समय पहले ही जिस जगह पर जिस व्‍यक्ति ने नक्‍सलियों से खूनी लडाई लडी हो, इस वक्‍त उसकी मन: स्थिति कैसी रही होगी। खैर वो बोलते रहे।  हमने भी उन्‍हें नहीं टोका।  वो सिलसिलेवार पूरे घटनाक्रम को बयां करते रहे और आखिरी में उन्‍होंने जो कहा, उसने झकझोर कर रख दिया, मुझे याद है उनके वो शब्‍द, ‘नक्‍सलियों ने दोनो ओर से फायरिंग की, हमने भी जमकर मुकाबला किया, नक्‍सलियों को कडा टक्‍कर देते देते  एसपी साहब शहीद हो गए हैं। करीब दो बजे ये लाईनें हमने सुनी। ढाई बजे के आसपास हम वहां से निकले और पांच छह मिनट में ही मानपुर पहुंच गए। जैसे ही नेटवर्क मिला तुरंत चैनल में यह खबर दी। ‘एसपी श्री वी के चौबे शहीद। उनके साथ 29 पुलिस जवान शहीद।’
वो पूरा वाक्‍या अब तक नहीं भूला है मुझे। अपनी जिंदगी में कभी भी इतनी लाशें एक साथ नहीं देखी मैंने। और जब देखने मिलीं तो जवानों की। करीब दो साल से राजनांदगांव में एसपी रहे श्री वीके चौबे साहब एक ऐसे पुलिस अफसर थे जो आम इंसान की तरह ही रहते थे और उनका दरबार हर वक्‍त आम लोगों के लिए खुला रहता था। अपने मातहतों के लिए उनके मन में जो प्रेम था, उसी प्रेम ने उन्‍हें हर दिल अजीज बनाया था और उसी प्रेम के चलते वो शहीद हो गए।
दरअसल,  मानपुर क्षेत्र का मदनवाडा पहले नक्‍सलियों का गढ हुआ करता था। यहां नक्‍सली अपनी ट्रेनिंग कैम्‍प चलाते थे। इस क्षेत्र में नक्‍सलियों के वजूद को खत्‍म करने के लिए आईजी श्री मुकेश गुप्‍ता और एसपी श्री वी के चौबे ने मदनवाडा में ही पुलिस कैम्‍प स्‍थापित किया। इससे नक्‍सली बौखला गये। उन्‍होंने एक बडी साजिश तैयार की। 12 जुलाई को सुबह उन्‍होंने सातवीं वाहिनी सीएएफ के दो जवानों को तब गोली मारी जब वो जवान शौच के लिए गए थे। ये नक्‍सलियों की साजिश का हिस्‍सा मात्र था, उनका निशाना कुछ और था। नक्‍सलियों को मालूम था कि यह खबर जिला मुख्‍यालय तक जाएगी और एसपी मौके पर पहुंचने की कोशिश करेंगे। नक्‍सलियों ने इसकी तैयारी पहले से कर रखी थी और मानपुर से महज छह किलोमीटर दूर पक्‍की सडक पर बारूदी सुरंग लगा रखा था। एसपी  थे ही ऐसे,  वो अपने मातहतों के पास पहुंचते थे। इस खबर को सुनकर वो निकले..... पर नक्‍सलियों ने रास्‍ते में ही उन्‍हें रोक लिया। एसपी साहब एक बार नक्‍सलियों के चक्रव्‍यूह को भेदते हुए आगे निकल गए थे लेकिन फिर बीच में फंसे अपने जवानों के लिए वो फिर से मौके  पर पहुंचे और फिर दोबारा  वहां से नहीं निकल सके।
इस घटना में एसपी श्री वी के चौबे के साथ निरीक्षक विनोद ध्रुव, उप निरीक्षक धनेश साहू,  उप निरीक्षक कोमल साहू, प्रधान आरक्षक गीता भंडारी, प्रधान आरक्षक संजय यादव, प्रधान आरक्षक जखरियस खलखो, आरक्षक रजनीकांत, आरक्षक लालबहादुर नाग, आरक्षक निकेश यादव, आरक्षक वेदप्रकाश यादव, आरक्षक श्‍यामलाल भोई, आरक्षक बेदूराम सूर्यवंशी, आरक्षक लोकेश छेदैया, आरक्षक अजय भारव्‍दाज, आरक्षक सुभाष बेहरा, आरक्षक रितेश देशमुख, आरक्षक मनोज वर्मा, आरक्षक अमित नायक, आरक्षक टिकेश्‍वर देखमुख, आरक्षक मिथलेश साहू, आरक्षक प्रकाश वर्मा, आरक्षक सूर्यपाल वटटी, आरक्षक झाडूराम वर्मा, आरक्षक संतराम साहू और सातवीं वाहिनी सीएएफ भिलाई के दो प्रधानआरक्षक दुष्‍यंत राठौर और सुंदरलाल चौधरी भी शहीद हो गए।
शहीद एसपी श्री चौबे की शहादत को सलाम करने आज राजनांदगांव में उनकी मूर्ति की स्‍थापना की जा रही है। चौबे साहब और शहीद जवानों को सलाम.................

29 टिप्‍पणियां:

  1. sath hi aapke himmat ki tarif karni hogi ki aap us postion me jane se nahi ghabarye

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  2. amar shaheed v k chaube samet sabhi jawano ko meri vinamr shhraddhanjali.man bhar jata hai jab aisi khabar milti hai,bas itna hi kah sakta hun ki, hadse itne hai mere shahar me ke, akhbaaro ko nichodo to khoon tapakta hai.

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  3. sarva pratham amar saheed shri V. K. Chaubey aur unke saath kartavya ki bedi par apne aap ko kurbaan kar dene walo ,ko sat sat naman karta hun. aapka ka ye lekh mujhe fir se us hadse me le gaya jab maine ye khabar pehli baar suni thhi,jab sahara se tumhari khabar ...saheed ki scroll patti dekhi us samay mai mobile par shreemati Chaubey ji ko dhandhas bandha raha thha aur tv ke saamne baitha thha, maine aur unho ne wo scroll samachaat ...saheed ek saath dekha aur maine mobile par jo medam ki cheekh suni uska bayaan mai chahu to bhi sabdo me nahi kar sakta,wo ek matra anubhav hi kiya ja sakta hai.

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  4. देश पर मर मिटने वाले इन अमर शहीदों की गाथा सुनकर, अपने देश पर फख्र हो रहा है, वहीँ दिल ग़मगीन हो गया है, हताशा इसलिए है की सरकार अब भी नहीं जागी है...

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  5. सुन्दर प्रस्तुति ||
    जबरदस्त आक्रोश ||
    बधाई ||

    हे नक्सली
    अतिशय बली
    हे आतंकवादियों की पूरी लश्कर
    कोई नया उत्पात मत कर
    मंदिर-मस्जिद, मठ-मजार
    मत उजार
    बस
    बस, ट्रेन, जहाज को
    बम से उड़ाना
    बन्द करो
    मत बार-बार
    प्रदेश बन्द करो
    बन्द करो
    तहलका मचाना--
    चलो
    अब मत खलो
    एक उपाय बताता हूँ
    महीने में कम से कम
    दो रेल एक्सीडेंट,
    चार बस की टक्कर
    एक जहाज या हेलीकाप्टर क्रैश
    भूस्खलन, बादल फटना
    ठनका या तूफ़ान --
    तुम्हे देता हूँ --
    किसी एक की जिम्मेदारी ले लेना --
    तुम भी खुश
    और नो एक्स्ट्रा रिस्क
    हाँ
    कभी-कभी
    सुनामी का कहर
    भूकम्प का असर
    आग की आफत
    भी कर लेना अपने नाम ||
    कृपा करो दयानिधि मारन--

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  6. बहुत ही बढ़िया लेख बहुत ही अच्छा लगा पढ़ कर !

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  7. atul bhai s.p sahab ki story padkar dukh hua hamare desh ki sarkarin itni kamjor hain ki bah apne desh main hi ho rahi is ladai ko khatm nahi kar pa rahi hai to kisi aur desh se mukable kise kar payengi s.p sri v.k chobe ko meri sat sat sridanjali

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  8. bahut achha likha hai aapne is hsahido ko hamar bhi naman

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  9. पहले देश के गद्दारों से लड़ते थे पर अब अफ़सोस की बात है की देश वासियों से लड़ कर हमारे योद्धा शहीद हो रहे हैं .... पता नहीं कब तक ये समस्याएं देश के वीरों को जान लेंगी ...

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  10. मैने इस घटना पर कई लेख एवं डाक्युमेंट्री पढी व देखी है , पर आपका यह लेख घटना का वास्तविक चित्रण करता हुआ मुझे वापस उस दिन, उस जगह पर ले गया.ऊपर वाला ऎसा दिन किसी को ना दिखाये,बहुत अभागा हू मैं जो उन्हें अपने साथ वापस नही ला सका. आपके ज़ज्बे को सलाम... , अमर शहीदों को शत्-शत् नमन्....

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  11. बहुत ही मर्माहत कर देने वाला घटना क्रम ऐसे मे घटनाओ के सिलसिले से खुद को अल्ग रख खबर के रूप मे कवर करना बहुत ही मुश्किल है स्वय़ं पत्रकार भी घटनाक्रम मे खुद को शामिल पाता है अपनी उस कवरेज का वीडीयो पोस्ट कर सके तो यह लेख और भी जीवंत हो जायेगा

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  12. शहीदों को नमन ...न जाने कब तक यह खूनी खेल चलता रहेगा ....

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  13. शहीदों को नमन। बात तो सही कहा है आपने की नक्सली अब अपराधी गिरोह में बदल गए है। पर पढ़ कर सीना चौड़ा हो गया की आज भी ऐसे पुलिस अधिकारी है जो जान की परवाह नहीं करते।

    देश को उनपर गर्व है।

    प्रेरक प्रस्तुति।

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  14. आपकी रचना को मीडिया मंच डॉट कॉम पर लगा रहा हूं आपके इजाजत के बिना। क्षमा करेगें।

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  15. सही कहा है आपने नक्‍सलवाद का नासूर हमारे देश को पीड़ा दिए जा रहा है न जाने कितने बेकसूर मारे जा चुके हैं... अफ़सोस की बात है .... पता नहीं कब तक ये समस्याएं देश के वीरों को जान लेंगी ...
    अमर शहीदों को शत्-शत् नमन...

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  16. atul ji..iss ko padh ke meri ankhe nam ho gayi...kya beeti hogi saheedo ke ghar walo ke dil pe...kyu ye naksalwaad ka jahar...fail raha hai...kya milta hai bekasuro ko maar ke...

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  17. नक्सलवाद ने तो देश की जनता का बहुत कुछ छीन लिया....

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  18. बहुत ही बढ़िया प्रेरक प्रस्तुति।
    अमर शहीदों को शत्-शत् नमन!!

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  19. bhot acha laga read kar kar aise subject par likhna bhot muskil hota hai ....par likhna chahye ..apne bhot acha likha mujhe bhot acha laga ...pata nhi kab iss sumasya ka nidan ho apayega...

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  20. चौबे साहब और समस्त् शहीद जवानों को सलाम !



    अतुल जी
    इस तरह के विषय भी आवश्यक हैं । निश्चय ही मेरी जानकारी में भी वृद्धि हुई

    आपकी लेखनी को हार्दिक बधाई !

    शुभकामनाओं मंगलकामनाओं सहित…
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  21. नमन इन अमर शहीदों को ....
    यह जन्माष्टमी देश के लिए और आपको शुभ हो !

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