''एक ऐसी चिडिया जो स्कूल जाती है। प्रार्थना में शामिल होती है। पढाई करती है। मध्यान्ह भोजन करती है। बच्चों के साथ खेलती है।'' इस चिडिया का नाम है रमली। याद आया......। जी हां, पिछले साल मार्च महीने में ही मैंने इस चिडिया पर एक पोस्ट डाली थी, इस चिडिया के करतबों को लेकर, एक चिडिया जो करती है पढाई।
उस समय कुछ ब्लागर मित्रों ने और कुछ अन्य दोस्तों ने मुझसे कहा था कि यदि संभव हो तो इसका वीडियो भी यहां दूं। तब से कोशिश कर रहा था, अब लगभग एक साल बाद इसका वीडियो यहां अपलोड कर रहा हूं। आप वीडियो का मजा लें और ऊपर दिए लिंक में जाकर इस चिडिया की कहानी भी पढ सकते हैं.......
बहुत खूब.
जवाब देंहटाएंBahut rochak!
जवाब देंहटाएंbahut khoob .aabhar
जवाब देंहटाएंवाह!! अद्भुत!!
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया बेहतरीन प्रस्तुति,बहुत खूब....अतुल जी,...
जवाब देंहटाएंRESENT POST...काव्यान्जलि ...: तब मधुशाला हम जाते है,...
पुरानी पोस्ट भी पढ़ी...और विडियो भी देखा...ये तो कमाल की खबर है.
जवाब देंहटाएंविश्वास करना मुश्किल हो रहा है...पर आँखों देखी को कैसे झुठलाया जाए
वाह ...विश्वास ही नहीं होता
जवाब देंहटाएंस्तंभित कर दिया. आभार.
जवाब देंहटाएंwaah...adbhut...
जवाब देंहटाएंbahut achchha,..
जवाब देंहटाएंवाह ...बहुत खूब .. आपकी प्रस्तुति का आभार ।
जवाब देंहटाएंvaah -- Jee--- bahut khub.
जवाब देंहटाएं'एक करिश्मा और , कुदरत का'
जवाब देंहटाएंबहुत खूब, अतुल जी, .... रोमांचक.
यही तो कुदरत है
जवाब देंहटाएं.हम भी कुछ कम नहीं....
जवाब देंहटाएंरोचक, रोमांचक...
जवाब देंहटाएं------
..कितने लोग पढ़ते हैं किताब?
आओ होली खेलें...
बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार...
जवाब देंहटाएंआपकी सूक्ष्म दृष्टि काबिले-तारीफ़ है..
जवाब देंहटाएंबहुत ही रोचक प्रस्तुति...
जवाब देंहटाएंसुन्दर:-)
Interesting !
जवाब देंहटाएंतोता मैना की कहानी ,ये कहानी अब पुरानी पुरानी हो गई ...
जवाब देंहटाएंकितनी सुन्दर प्यारी 'रमली'
हर चिड़िया से न्यारी रमली
सबको सबक सिखाती है
सबका मन बहलाती है.
पढ़ने से ही ज्ञान मिलेगा,
दुनिया को समझाती है.
चीं-चीं कर के गीत सुनाती,
सबकी बनी दुलारी रमली.
रोज सुबह आ जाती है,
कक्षा में छा जाती है.
मिलजुल कर सब करो पढ़ाई,
बात यही बतलाती है.
रोज-रोज़ आती है पढ़ने,
कभी न हिम्मत हारी रमली.
बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार। मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
जवाब देंहटाएंब्राह्मिनी मैना की कमाल की कहानी !
जवाब देंहटाएंये कामन मैना -देशी मैना है -अक्रिड़ोथेरस ट्रिसटिस
हटाएंदेश में कहीं भी बहुलता से मिलती है -यह थोडा अलग स्वभाव की है
आवाज की नक़ल भी कर सकती है!
पू्र्व जन्म के संयोग और संस्कार वश
जवाब देंहटाएंसम्भव होता होगा। पर प्रस्तुति अच्छी है।
धन्यवाद।
आनन्द विश्वास।
मजेदार रही यह चिड़िया !बधाई
जवाब देंहटाएंस्कूल जाती चिड़िया, बढिया है।
जवाब देंहटाएंबहुत रोचक प्रस्तुति...
जवाब देंहटाएंबहुत रोचक और सार्थक जानकारी के लिए आभार ...!!
जवाब देंहटाएंइसके संरक्षण का प्रयत्न ज़रूर होना चाहिए ...!!
जवाब देंहटाएं♥
बहुत रोचक है चिड़िया भी और पोस्ट भी …
अतुल जी !
पुरानी पोस्ट पुनः पढ़ना पसंद आया
आभार विडियो के लिए …
मस्त वीडियो..कमाल की पत्रकारिता। खबरें ऐसी भी होती हैं। वाह! आनंद आ गया।
जवाब देंहटाएंआश्चर्यजनक!प्रस्तुतीकरण भी बढ़िया !
जवाब देंहटाएंbeautiful post based on humanity.
जवाब देंहटाएंthanks to school and teachers including
students NOT YOU .
JUST PRANAM SWIKAREN.
बहुत बढ़िया...
जवाब देंहटाएंमध्यप्रदेश में ये बहुतायत में पायी जाती हैं....
बच्चों की धारणा होती है कि एक देखें तो दुःख...और दो देखें तो खुशी मिलेगी....क्यूंकि ज्यादातर ये जोड़ों में या झुण्ड में मिलती हैं..
शुक्रिया.
पता नहीं सर मेरी टिप्पणियाँ कहाँ चली जाती हैं.....स्पाम से पीढित हूँ शायद...
जवाब देंहटाएंदुबारा टिप्पणी करते समय वो जोश नहीं आता...
रोचक पोस्ट के लिए शुक्रिया.
सादर
अनु.
चिड़िया का ये रूप और बच्चे की तोतली में उसके मनोभाव ..बहुत ही रोचक लगे...सादर धन्यवाद इस सुन्दर पोस्ट के लिए..
जवाब देंहटाएंbahut sundar rochak prastuti..
जवाब देंहटाएंchidiya MAINA ki prajati ki maaloom hoti hai... maina bahut samjhdar hoti hai..