01 जुलाई 2017

आस्था का भी कोई वजन होता है क्या?

"बड़े दिनों, दिन क्या कई महीनों करीब 17-18 महीनों (साल लिखना ज्यादा बड़ा लगता ☺) से ब्लाग लेखन से दूर था। ऐसा नहीं कि लिखना बंद हो गया था लेकिन हर दिन हत्या हो रही थी ब्लाग पोस्ट्स की! और यह हत्या और कोई नहीं कर रहा था, फेसबुक कर रहा था!! याद नहीं आ रहा लेकिन फेसबुक में ही किसी मित्र ने एक बार लिखा भी था कि फेसबुक के छोटे-छोटे पोस्ट ब्लॉग के विषयों की हत्या कर देते हैं!!! ऐसा मेरे साथ भी हो रहा था। डेस्कटॉप में महीनों बैठना नहीं हो पाता, मुद्दे आते हैं तो मोबाइल के जरिए फेसबुक में स्टेट्स अपडेट कर दिया, बस... आलस की एक वजह यह भी कि अब ब्लॉग में पढऩे वाले ज्यादा नहीं, फेसबुक में लिखा तो सूची में शामिल मित्र तो पढ़ ही लेंगे, ये अलग बात है कि टिप्पणियां या प्रतिक्रिया कुछ ही आए। कई बार सोचा कि अब ब्लॉग की ओर लौटना है, पर सोच कहां हर बार पूरी हो पाती है! इसी बीच इसी फेसबुक (जिस पर हत्या का आरोप है) में ब्लॉगों में रात 12 बजे घंटा बजाकर लौटने का स्टेट्स पढ़ा। लगा, यह अच्छा मौका है। अब लौटा जाए और कोशिश किया जाए कि नियमित रहूँ।  वैसे भी ब्‍लाग लेखन ने उम्‍मीद से ज्‍यादा दिया है मुझे। दो दशक से ज्‍यादा की पत्रकारिता में जो हासिल किया, उससे ज्‍यादा ब्‍लागरी से मिला। देशभर में मित्र। अनेकों शुभचिंतक। कई मार्गदर्शक। अंतरराष्‍ब्‍ृीय स्तर पर सम्‍मान।  तो बस आ रहा हूं। अब लंबी छुट्टी हो गई है तो भगवान का नाम लेकर ही लौटा जाए और भगवान की ही पोस्ट के साथ तो हाल ही में बस्तर भ्रमण के दौरान मिले एक अनुभव के साथ हाजिर हूँ।"


छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा के नाम से देशभर में बदनाम लेकिन अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक खूबियों से सराबोर बस्तर में कई ऐसी चीजें हैं, जो न सिर्फ खुद को दूसरों से अलग करती है बल्कि अचंभित भी करती है। इसी बस्तर के दंतेवाडा़ में माँ दंतेश्वरी का मंदिर पूरे छत्तीसगढ़ और पडो़स में लगे आंध्रप्रदेश के लोगों की आस्था का केन्द्र है। माँ दंतेश्वरी मंदिर के पीछे माता की बगिया में काल भैरव का मंदिर है। इसी परिसर में टाट की छत के नीचे शिवजी विराजमान हैं। मान्यता है कि शिवलिंग को तीन उंगलियों में उठाकर रख और इस समय तक अपनी मनोकामना भगवान तक पहुँचाया जाता है। ऐसा तीन बार किया जाता है (वैसे तीन उंगलियों में उठाना आसान भी नहीं है)

तो हमने भी कोशिश की और शिवजी की कृपा से सफल भी हो गए। तीन बार ऐसा किया। फिर इच्छा हुई तो फिर से ऐसा किया। वहीं बैठे पुजारीजी मुस्कुराते हुए पूछा, कितना वजन था तो उल्टे उनसे ही सवाल पूछ लिया कि आस्था का भी कोई वजन होता है क्या?

फिर तो बहुतों ने कोशिश की। कुछ सफल हुए। कुछ नहीं कर पाए। बच्चे जब ऐसा नहीं कर पाए तो दोनों हाथों से शिवलिंग उठा भगवान से बातें कर ली।

आप कभी बस्तर जाएं तो दंतेवाड़ा जरूर जाएँ, मां दंतेश्वरी का दर्शन करने के बाद शिवजी का आशीर्वाद भी लें।

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

30 टिप्‍पणियां:

  1. फिर दिल दो #हिन्दी_ब्लॉगिंग को..

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    1. बिल्कुल सर... अब तो ब्लॉगों में बहार है

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  2. कितनी छोटी छोटी सी बातों में हमारे देश मे आस्था काम करती है ,लेकिन आस्था से ही बड़े बड़े काम होते देखे हैं हमने ,ऐसा पहली बार सुना कि उन्हीं शिवजी को उठापटक करवाते हैं लोग जिनके कारण उठापटक करते हैं बढ़िया जानकारी, कभी मौका मिला तो देखेंगे जरूर

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    1. सही कहा, आस्था से सारे काम आसान हो जाते हैं। कभी मौका मिले तो जरूर जाईएगा। छत्तीसगढ़ के माथे पर बसा बस्तर अनूठा और प्रकृति के बेहद नजदीक है।

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  3. ऐसा देश है मेरा....तरह तरह के लोग और अलग अलग पूजा के तरीक़े ।
    बड़ी बात कही, आस्था का भी कोई वक़्त होता है ।सबकी अपनी आस्था है जो उन्हें बल देती है,जीवन मे सकारात्मकता बनाये रखती है।

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    1. हाँ। हर जगह की अपनी अलग अलग परंपराएं होती हैं। इन्हीं विविधताओं के साथ हमारा देश सबसे अलग है। सबसे जुदा है।

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  4. आस्था किसी न किसी रूप में हर एक में विद्यमान रहती है ।नई जानकारी युक्त पोस्ट ।

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  5. इस जगह के बारे में पहली बार जाना ... आस्था के अपने मायने हैं जीवन को संबल देने के लिए |

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  6. बात सिर्फ आस्था की ही होती है ... कल्पना में मैंने भगवान् शिव को उठाया, जब जाना होगा तो हकीकत में उठाऊँगी

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    1. जरूर। कभी भी छत्तीसगढ़ का कार्यक्रम बने तो बताईएगा। आप शिवजी की कृपा हासिल कर लेंगी और हम आपका सांनिध्य, आपका स्नेह हासिल कर लेंगे।

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  7. आस्था का वजन नहीं सिर्फ और सिर्फ भाव होता है ....... नमः शिवाय !

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (02-07-2016) को "ब्लॉगिंग से नाता जोड़ो" (चर्चा अंक-2653) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. अरे वाह!
      लंबे अरसे बाद आया और तुरंत चर्चा मंच में आ गया। शास्त्री जी पहले जब खूब सक्रिय था तब सप्ताह में दो दिन चर्चा मंच सजाने का काम मैं करता था। वाकई जबरदस्त दिन थे वो।

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  9. सही है! आस्था तो आत्मा का जुड़ाव है, उस शक्ति से जिसे हर क्षण महसूस करते हैं। जय माँ दंतेश्वरी
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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    1. सही कहा आपने।
      जय मां दंतेश्वरी

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  10. सही है! आस्था तो आत्मा का जुड़ाव है, उस शक्ति से जिसे हर क्षण महसूस करते हैं। जय माँ दंतेश्वरी
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  11. ब्लोगिंग की दुनिया की बात ही अलग है और सच में आज सालों बाद ब्लॉग पढने में वो ही आनंद आ रहा है जो पहले आता था बेशक पोस्ट जरूर मैं लगाती रहती हूँ लेकिन पढने आना बंद सा ही हो गया था और उसे शुरू कराने का श्री ताऊ को जाता है

    सही कहा लेकिन हम तो कहेंगे
    ताऊ के डंडे ने कमाल कर दिया
    ब्लोगर्स को बुला कमाल कर दिया

    #हिंदी_ब्लोगिंग जिंदाबाद
    यात्रा कहीं से शुरू हो वापसी घर पर ही होती है :)

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    1. वाकई। अच्छा लग रहा है।
      सही है, वापसी घर पर ही होती है।

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  12. हमारे यहाँ ३३ करोड़ देवी देवता ऐसे ही नहीं हुए है |

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    1. हाँ, और सभी देवी देवताओं के अपने अलग अलग अंदाज भी हैं।
      आभार

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  13. #हिंदी_ब्लोगिंग जिंदाबाद हिन्दी ब्लॉग दिवस पर आपका योगदान सराहनीय है

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  14. अच्छा लग रहा है सबको वापस आता देख...सार्थक लेखन.....अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉग दिवस पर आपका योगदान सराहनीय है. हम आपका अभिनन्दन करते हैं. हिन्दी ब्लॉग जगत आबाद रहे. अनंत शुभकामनायें. नियमित लिखें. साधुवाद.. आज पोस्ट लिख टैग करे ब्लॉग को आबाद करने के लिए
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  15. वाह, कभी इसके बारे में सुना नहीं था

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  16. आस्था का अपना ही महत्त्व होता है
    बहुत बढ़िया लिखा

    शुभकामनाएं

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  17. आस्थाओं की यही तो विशेषता है कि जिसे विश्वास हो उसे कोई जवाब नहीं देना पडता और जिसे न हो उसके लिये कोई जवाब संतुष्ट करने वाला नहीं.

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  18. लिखे शब्द प्रभावशाली हैं , लिखते रहें

    जाने कितने ही बार हमें, मौके पर शब्द नहीं मिलते !
    बरसों के बाद मिले यारो,इतने निशब्द,नहीं मिलते ! -सतीश सक्सेना
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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