प्रशासन ने गरीबों के मकानों को किया जमींदोज, बनेगा विधायकों, सांसदों का आवास
राजनांदगाँव। राजधानी रायपुर के माना इलाके में स्थित नकटी गांव में प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। प्रशासन के अनुसार, ग्राम नकटी के वार्ड क्रमांक 16 और 17 में कुल 48 मकान सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्मित पाए गए हैं। इन मकानों को पहले ही राजस्व विभाग की ओर से बेदखली का नोटिस जारी कर चस्पा किया जा चुका था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद प्रशासन ने बुलडोजर की मदद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस जगह को विधायकों और सांसदों का आवास बनाने के लिए खाली कराया जा रहा है।
प्रशासन ने कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से चले और किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके, इसके लिए आधी रात से ही गांव को छावनी में बदल दिया था और 1,000 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। सुबह चार बजे से अलग-अलग टीमें गांव पहुंचनी शुरू हो गईं। प्रत्येक टीम ने चिन्हित मकानों पर कार्रवाई शुरू की।
ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस की घेराबंदी तोड़ने के प्रयास में दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है, इसलिए बेदखली की कार्रवाई की जा रही है।
दूसरी ओर कार्रवाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों का तर्क है कि वे इस जमीन पर सालों से रह रहे हैं। इनमें से कई मकान को पीएम आवास योजना के तहत बनाए गए हैं। इलाके में तनाव को देखते हुए गांव के आसपास बैरिकेडिंग और निगरानी भी बढ़ा दी गई है। शासन की योजना यहां 55 एकड़ में विधायक कॉलोनी विकसित करने की है। बेदखली को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के दावों-प्रतिदावों के बीच पूरे गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं तथा पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।
गौरतलब है कि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दो दिन पूर्व ही यानि 27 जून को नकटी के ग्रामीणों से मुलाकात कर आश्वासन दिया था कि उनका मकान उनके व्यवस्थापन होने तक नहीं टूटेगा, लेकिन सांसद का यह आश्वासन भी प्रशासन के बुलडोजर के आगे नहीं टिक पाया। यहाँ यह भी गौर करने वाली बात है कि सिर्फ प्रधानमंत्री आवास ही नहीं, नकटी के ग्रामीणों को बिजली, पानी सहित सारी सुविधाएं बरसों से मिल रही थी। यदि ये मकान अवैध थे तो बरसों तक प्रशासन और शासन क्या इस इंतजार में था कि जब माननीयों के मकान के लिए जमीन की जरूरत पडे़गी, तब इन अवैध कब्जे को हटाया जाएगा?
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