आज मन में यह ख्याल आ रहा है कि खुशियां मनाऊं या गम....? आज जन्मदिन है मेरा। उम्र एक साल बढ गई.... या कम हो गई....., क्या कहूं, क्या समझूं। वैसे जन्मदिन को उत्साह के रूप में मनाया जाता है। जश्न किया जाता है इस दिन...... पर क्या दूसरा पहलू यह नहीं कि जितनी उम्र ऊपरवाले ने लिखी है उसमें एक साल कम हो गए.........! खैर...... जीवन जितना भी है, उसे उत्साह के साथ जीना चाहिए, और ये कोशिश मैं हमेशा करता हूं। उम्र कम हुई या बढी इस चिंता को छोड ये तो सोचा ही जा सकता है आज के दिन कि अब तक क्या खोया और क्या पाया....? काफी कुछ पाया है तो काफी कुछ खोया भी है मैंने अपने अब तक के सफर में। जन्मदिन पर आज एक बार फिर आंखे नम हो गई हैं, उसे याद कर जिसने मुझे इस दुनिया में लाया। मेरी मां। मैं दुनिया में उससे सबसे ज्यादा प्यार करता हूं और सबसे ज्यादा नाराज भी हूं उससे। जब मैं चार साल का था, उस वक्त वो मुझे छोडकर इस दुनिया से रूखसत हो गई थी और मैं ............
किसी महापुरूष ने कहा है, हम जब पैदा होते हैं तो हम रोते रहते हैं पर सारी दुनिया हंसती है, हमें अपने जीवनकाल में ऐसे काम करने चाहिए कि जब हम मरें तो हम हंसते रहें पर सारी दुनिया रोए........। आप सबकी दुआएं चाहिए कि मैं अपने जीवन में ऐसे कर्म कर सकूं........।
जन्मदिन के अवसर पर अपनी एक पुरानी कविता प्रस्तुत कर रहा हूं....
मेरे जीवन का
एक वर्ष और
बीत गया....,
एक वर्ष और
बीत गया....,
धूमिल छवि
जिसकी
है मेरे पास.....।
थोडी खुशियां, थोडे गम
कहीं जीत, कहीं हार
यही तो है,
जिनके साए में
कट जाती है
जिंदगी.......।
एक स्वच्छंद आकाश
और है मेरे पास,
जिसमें लिखना है
मुझे अपना कल,
अपना आने वाला कल
उस कल को
खुशगवार बनाएगी
तुम्हारी,
सिर्फ तुम्हारी
दुआएं ......................।
थोडी खुशियां, थोडे गम
कहीं जीत, कहीं हार
यही तो है,
जिनके साए में
कट जाती है
जिंदगी.......।
एक स्वच्छंद आकाश
और है मेरे पास,
जिसमें लिखना है
मुझे अपना कल,
अपना आने वाला कल
उस कल को
खुशगवार बनाएगी
तुम्हारी,
सिर्फ तुम्हारी
दुआएं ......................।
