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11 सितंबर 2011

अध्‍ययन यात्रा बनाम दारू पार्टी.... !!!!!


दारू जो कराए कम है! और दारू की लत.... पूछो मत! ! लोग अपना मान सम्‍मान और बाकी सब भूलकर दारू के लिए सब कुछ करने तैयार हो जाते हैं! ! !  इस हफ्ते राजनांदगांव के कुछ पत्रकारों ने भी ऐसा ही किया और दारू पीने की ललक ने उनको दूसरों के सामने हाथ फैलाने भी मजबूर कर दिया! ! ! ! सुबह सबेरे पत्रकार अपने घर से निकले तो थे छत्‍तीसगढ विधानसभा की कार्रवाई देखने और इस यात्रा को नाम दिया गया अध्‍ययन यात्रा पर रात को जब पत्रकार वापस अपने घरों को लौटे तो उनका अनुभव काफी बुरा था। चंद पत्रकारों यानि चार पांच लोगों की वजह से यह अध्‍ययन यात्रा दूसरे पत्रकारों के लिए शर्मनाक वाक्‍या बनकर रह गया। दरअसल में छत्‍तीसगढ के मुख्‍यमंत्री और राजनांदगांव के विधायक डा रमन सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र के पत्रकारों के लिए विधानसभा की कार्रवाई का अवलोकन और अध्‍ययन का कार्यक्रम तैयार किया था। यह कार्यक्रम वैसे तो काफी अच्‍छा और सराहनीय था पर इस कार्यक्रम को मूर्तरूप देने का जिम्‍मा उठाने वाले जिला प्रशासन और जिला जनसम्‍पर्क कार्यालय की पत्रकारों के सम्‍मान को लेकर अनदेखी के कारण अव्‍वल तो  प्रमुख पत्रकारों ने कार्यक्रम से खुद की दूरी बना ली। प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के चर्चित चेहरों के कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिए जाने के बाद जनसम्‍पर्क विभाग को थोडा सुकून फिर भी मिला कि उनको करीब 20 से 25 पत्रकार मिल गए थे जो मुख्‍यमंत्री के कार्यक्रम में संख्‍या दिखाने उनके लिए पर्याप्‍त थे पर जिन चेहरों को मुख्‍यमंत्री नाम से पहचानते हैं उनकी गैर  मौजूदगी ने विधानसभा में असर तो दिखाया और जो जानकारी मिली उसके मुताबिक कार्यक्रम रूखा रूखा सा रहा। जो गए थे, उनको पता चला है कि एक एक सूटकेश और उसके भीतर सफारी सूट का कपडा रखकर ‘गिफ्ट’ दिया गया। मिनी बस में ले जाए गए पत्रकारों को होटल बेबीलोन में खाना खिलाया गया।
यहां तक तो ठीक ही था..... पर इसके आगे जो हुआ वह शर्मनाक ही कहा जाएगा। पिछले दो तीन दिनों से मैं सोच रहा था कि जिन अखबारों के पत्रकार  इस ‘अध्‍ययन यात्रा’ में शामिल हुए थे, उन्‍होंने इस पर अपने अखबारों में  कुछ क्‍यों नहीं लिखा और फिर जिला जनसम्‍पर्क विभाग जो सरकार की छोटी से छोटी उपलब्धियों को बडे से बडे प्रेस नोट में  तब्‍दील करता है, उसने पत्रकारों को विधानसभा घुमाने के इस ‘महति’ कार्य पर कोई रपट क्‍यों नहीं जारी की.... पर इसका जवाब मुझे बाद में मिला...... ‘अध्‍ययन यात्रा’ एक तरीके से कुछ पत्रकारों की दारू की लत के चलते ‘शर्मनाक यात्रा’ में बदल गई थी.... तो कैसे इस पर कोई पत्रकार कलम चलाता और कैसे जनसम्‍पर्क विभाग रपट जारी करता...... खैर मैं इस ‘अध्‍ययन यात्रा’ का हिस्‍सा नहीं था और मैंने पहले ही आमंत्रण के सरकारी रवैये से नाराज होकर इस आयोजन से किनारा कर लिया था... हमेशा की तरह... अपनी आदत के चलते..... और सच लिखने की अपनी बदनाम आदत के चलते उस कथित अध्‍ययन यात्रा की कहानी यहां लिख रहा हूं।
इसी महीने के दूसरे गुरूवार यानि 8 सितम्‍बर को विधानसभा भ्रमण का कार्यक्रम तय हुआ  था। जनसम्‍पर्क विभाग ने जिला मुख्‍यालय के सभी प्रमुख पत्रकारों को टेलीफोन कर मुख्‍यमंत्री के आमंत्रण की खबर दी और सबको सुबह आठ बजे जनसम्‍पर्क कार्यालय में उपस्थित होने का आग्रह किया था। प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के  पत्रकारों को रायपुर ले जाने और मिनी बस की व्‍यवस्‍था की गई थी और उन्‍हें बकायदा बताया गया था  कि विधानसभा भ्रमण के बाद होटल बेबीलोन में लंच का कार्यक्रम है।‍ आमंत्रण के तरीके और  जाने के साधन से  नाराज होकर प्रमुख  लोगों ने इससे दूरी बना ली जिसमें मैं भी शामिल था। मेरे अलावा इलेक्‍ट्रानिक मीडिया से जी छत्‍तीसगढ, साधना टीवी और दूरदर्शन के पत्रकार इस कार्यक्रम में नहीं गए तो प्रिंट से हरिभूमि, नवभारत, सबेरा संकेत और नांदगांव टाईम्‍स ने भी दूरी बना ली।
खैर......  जो गए उनके लिए विधानसभा भ्रमण एक अच्‍छा अनुभव होना चाहिए था और वहां विधानसभा की कार्रवाई देखकर वो एक अच्‍छा  अनुभव और ‘गिफ्ट’ लेकर  लौटते.... पर  चंद पत्रकारों की दारूबाजी की लत ने सबको बुरा अनुभव दे दिया! सुबह आठ बजे यहां से निकलने वाले पत्रकार यहां से करीब साढे दस से 11 के आसपास निकले और  सीधे विधानसभा पहुंचे। करीब डेढ दो घंटे तक विधानसभा भ्रमण और फिर कार्रवाई देखने के बाद वादे के अनुरूप वो होटल बेबीलोन ले जाए गए जहां उनका भोजन का कार्यक्रम था..... इसी जगह में कुछ पत्रकार अपनी दारू की लत पर काबू  नहीं रख पाए और उन लोगों ने भरी दोपहरी को बेबीलोन में दारू पिया। बात नहीं खुलती यदि वो दारू पीने के बाद उसका बिल भर देते और चुपचाप भोजन कर   घर लौट जाते लेकिन.........
चार से पांच पत्रकारों ने दारू पिया और उनका बिल बना 3876 रूपए! अब इनके  पास दारू के बिल भरने के लिए पैसे नहीं थे! ! सो शुरू हो गया चंदा करने का काम! ! ! किसी की जेब में सौ रूपए थे तो किसी की जेब में दो सौ रूपए! ! ! ! उन बेचारों ने तो सरकारी खजाने से खाने के साथ दारू का बिल भी पटेगा ये सोच रखा था शायद! ! ! ! ! पर बिल आ गया! ! ! ! ! ! ! क्‍या करते....... जिनने नहीं पी या ये कहें जो पीते ही नहीं उनसे भी चंदा किया गया! ! ! ! ! ! ! ! जनसम्‍पर्क विभाग से उनके साथ गए लोगों के पास भी इतने रूपए नहीं थे सो उनने दूसरे पत्रकारों से मांग मांग कर बिल के पैसे इकट्ठे किए और फिर बिल पटाया गया! ! ! ! ! !
बहरहाल, राजनांदगांव से विधानसभा के अध्‍ययन पर गए पत्रकारों के दल के स्‍वागत सत्‍कार के लिए बेबीलोन होटल में मौजूद रायपुर जनसम्‍पर्क विभाग के अफसरों के सामने भी यह अनूठा नजारा था...... पत्रकारों ने दारू तो पी ली पर जेब में रूपए नहीं थे....उनके सामने भी दूसरे पत्रकारों को शर्मिंदगी का सामना करना पडा। अब कुछ लोग कहेंगे दारू ही तो पी ही... चोरी तो नहीं की.... पर क्‍या ये माहौल और तरीका उचित था........... ?????


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