06 मई 2011

प्‍यार, प्‍यार, प्‍यार......


http://atulshrivastavaa.blogspot.com
जिंदगी इंसान को कभी कभी ऐसे मोड पर लाकर खडा कर देती है कि इंसान विचारशून्‍य हो जाता है और कोई फैसला लेने की स्थिति में नहीं रहता। मैं भी स्‍वयं को ऐसी ही परिस्थिति में पा रहा हूं और अपने हालात को आप सब से साझा कर रहा हूं। अब आप ही बताईए कि मुझे क्‍या करना चाहिए। मैंने अपनी जिंदगी का फैसला आप पर छोड दिया है। 
मैं आकाश। मैं एक निजी कंपनी में काम करता हूं। मेरी कहानी कोई तीन वर्ष पहले शुरू होती है, जब मेरे कार्यालय में एक लडकी किसी काम को लेकर आई। परेशान थी लेकिन इस स्थिति में भी सुंदरता चेहरे में समेटे उस लडकी का नाम था राजश्री। उसका नाम मुझे उससे दूसरी मुलाकात में पता चला। उससे दूसरी मुलाकात भी इत्‍तेफाकन बस में हुई। पहल शायद उसी ने की। उसने मुझसे अपने कार्य की प्रगति को लेकर जानकारी चाही और इसी क्रम में मुझे उसका नाम भी पता चल गया।
मुझे याद है, एक दिन दफतर में देर तक काम करने के बाद मैं थका मांदा सा घर की ओर जा रहा था कि मुझे चक्‍कर सा आ गया और मैं सडक के किनारे के पार्क में कुछ देर आराम करने की गरज से चला गया और कोने के एक बेंच में आंखे मूंदकर बैठ गया। तभी मुझे अहसास हुआ कि कोई मेरे पास आकर बैठ गया है। मैंने आंखे खोला तो पाया कि वह राजश्री थी। उस मुलाकात में न उसने मुझसे कुछ कहा न मैंने उससे कुछ लेकिन आंखों ही आखों में बहुत बातें हुईं और बस इसी दिन से मेरे और राजश्री के संबंध गहरे होते चले गए। इसके बाद हम तकरीबन रोज मिलने लगे।
हम जब भी मिलते, ढेरों बातें होतीं। मेरे काम से लेकर उसके कालेज की पढाई और भविष्‍य तक की बातें हम करते। उन दिनों की हर एक बात मेरे जेहन में ताजी है। हम घंटों किसी पार्क के किसी कोने में बैठकर बतियाते रहते थे। एक दिन की बात है, मैंने मजाक में यूं ही राजश्री से कह दिया कि मेरा तबादला दूसरे शहर हो गया है, अब हमें एक दूसरे को भूल जाना चाहिए। मुझे आज भी याद है, उस दिन राजश्री ने अपना रौद्र रूप दिखाया था। उसने मुझे चेतावनी भरे लहजे में कह दिया था कि यदि मैंने उससे दूर जाने की कोशिश भी की तो वह अपनी जान दे देगी। ये मैं ही जानता  हूं कि मैने उसे उस दिन कितनी मिन्‍नतें करने के बाद मनाया था।
... लेकिन हम जो चाहें, वही हो ऐसा जिंदगी में अक्‍सर कहां होता है। राजश्री के पिता बैंक में अफसर थे। उनका तबादला दूसरे शहर हो गया और वे सपरिवार दूसरे शहर चले गए। राजश्री ने भी वहां कालेज में प्रवेश ले लिया लेकिन हम दोनों का सम्‍पर्क खतों और टेलीफोन के जरिए बना रहा। छह महीने तो ठीक ठाक बीते लेकिन फिर मैं अपने काम में ऐसे मशरूफ हुआ कि चाहकर भी राजश्री से सम्‍पर्क नहीं कर सका। काम के साथ कुछ पारिवारिक उलझने भी आईं और मैं उस राजश्री से पूरी तरह कट गया जिसके बगैर मैं जिंदगी की कल्‍पना करना भी बेमानी समझता था।
इस बीच राजश्री मुझसे सम्‍पर्क करने का प्रयास बकायदा करती रही लेकिन मैं ही उसे लेकर लापरवाह बना रहा। इमानदारी से कहूं तो इसकी वजह मेरी मशरूफियत के साथ साथ मेरे दफतर में नई नई काम पर लगी चांदनी थी। सुंदर गौरवर्ण चांदनी पर मैं कुछ ऐसे फिदा हुआ कि सब कुछ भूल सा गया। मेरा भी व्‍यक्तित्‍व आकर्षक था, सो चांदनी भी मुझे चाहने लगी। अब मैं राजश्री को पूरी तरह भूलने लगा था और सोचने लगा था कि चांदनी ही मेरे लिए बनी है... लेकिन नसीब को यह भी मंजूर नहीं था।
एक दिन मुझे पता चला कि चांदनी मुझे नहीं किसी और से प्‍यार करती है और उसकी शादी भी तय हो चुकी है। मैंने इस संबंध में चांदनी से बात की तो उसने मुझे दो टूक शब्‍दों  में कह दिया कि जिंदगी  में तो यह सब चलता है। दोस्‍ती करना, प्‍यार करना, इन्‍ज्‍वाय करना अलग बात है और शादी करना अलग बात। शादी के लिए स्‍टेटस भी देखा जाता है। उसकी बातें  सुनकर मैं सन्‍न रह गया।
सच है, मुसीबत में इंसान को अपने सच्‍चे हमदर्द की याद आती है। मुझे भी चांदनी की बेवफाई के बाद राजश्री की बहुत याद आई। उस दिन मुझे महसूस हुआ, किसी के दिल को दुखाने से कितनी तकलीफ होती है लेकिन अब पछताने के अलावा कुछ नहीं बचा था। मैं राजश्री से फिर से कैसे सम्‍पर्क करता। कोई डेढ साल हो गए थे मेरे राजश्री से सम्‍पर्क टूटे। कम से कम मुझमें तो हिम्‍मत नहीं बची थी राजश्री से सामना करने की और फिर यदि उसने मुझे बेइज्‍जत कर चले जाने कह दिया तो....? इसी डर से मैं खामोश हो गया।
राजश्री की मधुर स्‍मृतियों और चांदनी के कडवे अनुभव को मन में बसाए मैं जी र‍हा था कि एक मोड  पर मुझे प्रतीक्षा मिली। मैं न चाहते हुए भी उसकी ओर आकर्षित होता चला गया। आप यकीन कीजिए,  प्रतीक्षा की तरफ मेरा बढता आकर्षण राजश्री के प्रति मेरे दिल में बसे प्‍यार के ही कारण था। बात बेबात शर्त लगाने का प्रस्‍ताव रखना। छोटी सी बात में गुस्‍से से मुंह फुलाना। गाल में  हल्‍की सी चपत लगा देना। गोद में सिर रखकर लेटने  पर बालों में हाथ की कंघी बनाकर फिराना। ये चंद ऐसी आदतें थीं जो राजश्री और प्रतीक्षा में एक जैसी थीं। मुझे चांदनी की बेवफाई और राजश्री से बिछडने के गम को भूलने के लिए प्रतीक्षा मिल गई थी।
एक दिन मैं  दफतर की छुटटी लेकर प्रतीक्षा के घर गया था। मुझे खबर मिली थी कि उसकी तबियत खराब है। उसके घर उस वक्‍त उसकी भाभी बस थी। उसने अपनी भाभी से मेरा परिचय बतौर दोस्‍त कराया लेकिन उसकी भाभी के अर्थपूर्ण मुस्‍कान ने जाहिर कर दिया कि वे हम दोनों के रिश्‍ते को समझ गई हैं। मेरा अनुमान गलत नहीं था, भाभी जब बैठक कक्ष में मुझे और प्रतीक्षा को अकेला छोडकर चाय बनाने गईं तब प्रतीक्षा ने मुझे बताया कि भाभी ने मेरी तस्‍वीर प्रतीक्षा की किताब में देख ली थी।
उस दिन तो मैं प्रतीक्षा के घर  से जल्‍दी चला आया लेकिन एक दिन प्रतीक्षा की भाभी ने मुझे दफतर फोनकर खाने के लिए घर आमंत्रित किया। नियत समय पर प्रतीक्षा के घर पहुंचने पर मुझे मालूम हुआ कि उस दिन प्रतीक्षा का जनमदिन है। मैंने प्रतीक्षा की भाभी से शिकायती लहजे में कहा, आपने मुझे पहले क्‍यों नहीं बताया कि आज प्रतीक्षा का जन्‍मदिन है मैं खाली हाथ ही आ गया तो उन्‍होंने भी शरारती मुस्‍कान के साथ कहा, आप मेरी ननदरानी को अपना जीवनसाथी बनाकर उसे जीवन की सारी  खुशियां देना, उसके  लिए यही सबसे बडा तोहफा होगा।
ऐसे ही एक दिन मैं छुटटी पर था। प्रतीक्षा मुझसे मिलने मेरे घर आई। उस वक्‍त घर में मेरी भाभी और बहन बस थीं। मैंने भी उनसे प्रतीक्षा का परिचय बतौर दोस्‍त  कराना चाहा लेकिन न जाने मेरे भीतर की कौन सी ताकत ने मुझसे यह कहलवा दिया कि, भाभी यह तुम्‍हारी देवरानी है। इतना सुनते ही मेरी छोटी बहन ने प्रतीक्षा से मुखातिब होकर तपाक से कह दिया, नमस्‍ते  भाभी। और प्रतीक्षा.... वह शरमाकर रह गई।
प्रतीक्षा और मेरी मुलाकात का सिलसिला कोई छह महीने चला। इस बीच हमने साथ जीने मरने की कस्‍में खाईं, एक दूसरे के प्रति असीम प्‍यार का इजहार किया और न जाने क्‍या क्‍या ख्‍वाब बुने। हम जब भी मिलते, एक दूसरे के दिल में एक दूसरे के प्रति पहले से ज्‍यादा प्‍यार पाते। मुझे ऐसा  महसूस होने लगा था कि यदि प्रतीक्षा मुझे  नहीं मिलती तो मेरा  जीवन अधूरा रह जाता। एक  दिन प्रतीक्षा मेरे पास आई। डरी सहमी सी, घबराई सी, उसने कहा, ‘आकाश बडे भैया को हमारे संबंधों के बारे में पता चल गया है और उनहोंने मुझे खूब डांटा है। भाभी को भी डांटा है।’
मैंने उसे समझाया और कहा, तुम डरो मत। मैं कल तुम्‍हारे भैया से बात करूंगा। अपनी शादी की चर्चा करूंगा।  प्रतीक्षा की इस धारणा को कि भैया हमारी शादी के लिए राजी नहीं होंगे, खत्‍म करते हुए उसे घर भेजा। प्रतीक्षा के भैया से मिलने पर बात की शुरूआत  कहां से करूंगा इसी उधेडबुन में मैं घर पहुंचा तो भाभी ने मुझे एक पत्र थमा दिया। पत्र में अपने पते की जगह  पर राजश्री के हाथों  की इबारत देखकर मैं सोच में पड गया कि इतने दिनों बाद राजश्री का पत्र! मैं सीधे अपने कमरे में गया और लिफाफे को खोलने के बाद  एक ही सांस  में पूरे पत्र को पढ लिया मैंने। इस पत्र को पाने के बाद मेरे मन में अंतर्व्‍दव्‍द सा मच गया और मैं अनिर्णय की स्थिति में आ गया।
राजश्री व्‍दारा मुझे लिखे पत्र का मजमून इस  प्रकार है,
प्रिय आकाश,
कैसे हो?  तुम मुझे शायद भूल गए होगे पर मैं तुम्‍हे आज भी नहीं भूली। मैं आज भी तुमसे बेइंतहा प्‍यार करती हूं। क्‍या तुम्‍हे याद नहीं कि हमने साथ साथ जीवन बसर करने की कसमें खाई थीं और मेरे शहर छोडकर जाने के बाद  तुम मुझे भूल गए। मैंने कई बार तुमसे सम्‍पर्क करने की  कोशिश की लेकिन मेरी हर कोशिश के बाद तुम मुझसे और दूर होते चले गए।
आकाश, मैं एक बार तुमसे मिलने तुम्‍हारे शहर भी गई थी। तुम्‍हारे घर भी गई थी लेकिन पता चला कि तुम लोगों ने मकान बदल दिया है। मैं निराश होकर वापस आ गई लेकिन तुम्‍हे भूली नहीं। समय दर समय मेरे मन में तुम्‍हारा प्‍यार और गहरा  होता चला गया। मुझे यकीन था, तुम एक न एक दिन मुझसे जरूर मिलोगे और मैं तुम्‍हे अपने प्‍यार की ताकत से फिर से हासिल कर लूंगी। मुझे कहीं से तुम्‍हारा पता मिला और सबसे पहला काम किया तुम्‍हे पत्र लिखने का।
आकाश, तुम्‍हे याद है न मैंने एक दिन तुम्‍हारे छेडने पर कहा था कि यदि हम बिछड गए तो मैं अपने आप को खत्म कर लूंगी। अब तक तो मैं इस उम्‍मीद में जिंदा थी कि तुम मिलोगे। और अब मुझे यकीन है कि तुम अपनी राजश्री को यूं मरने नहीं दोगे। तुमसे दूर होकर और जीया नहीं जाता। इस पत्र के मिलते ही तुम मुझसे मिलने आ जाना। बाकी बातें मिलने पर करेंगे।
तुम्‍हारी ही
राजश्री
सच मानिए राजश्री के इस पत्र ने मुझे अंदर से हिलाकर रख दिया। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि राजश्री मुझ जैसे व्‍यक्ति से इस कदर प्‍यार कर सकती है। मैं राजश्री को जानता हूं। वह कुछ भी कर सकती है। यदि मैं उससे जाकर नहीं मिला तो  वह यहां आकर न सिर्फ कोई बखेडा खडा कर सकती है बल्कि अपनी जान भी दे सकती है। दूसरी ओर प्रतीक्षा है, जो मेरी जीवन संगिनी बनने की आस लिए है।
मैं अपने आप को ऐसे दोराहे पर खडा  पा  रहा हूं, जहां से एक रास्‍ता मेरे पहले प्‍यार की ओर जाता है और दूसरा रास्‍ता उस ओर जाता है जहां प्रतीक्षा खडी है और उसकी जानकारी मेरी भाभी और बहन को भी है। यदि मैं पहले रास्‍ते में जाता हूं तो यह प्रतीक्षा के साथ ही धोखा नहीं होगा  बल्कि अपनी भाभी और बहन की नजर में भी मैं गिर सा जाऊंगा। यदि मैं दूसरे रास्‍ते में जाता हूं तो यह मेरे पहले प्‍यार का खून होगा। मैं फैसला नहीं ले पा रहा हूं कि किस रास्‍ते में जाऊं?  यदि आप मेरी जगह होते तो क्‍या करते.... ?

27 टिप्‍पणियां:

  1. Nice story.
    कल लखनऊ में शिक्षा को बढ़ावा देने के मक़सद से एक सम्मेलन हो रहा है, जिसमें सलीम भाई बुला रहे हैं और हम जा रहे हैं। हम ही नहीं बल्कि हमारे चार-छः ब्लॉगर साथी और भी चल रहे हैं।
    आप सब भी आमंत्रित हैं।
    आइयेगा, अगर आ सकें तो।

    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/7.html

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  2. दोस्त मैं अगर यहाँ होता तब:- पहले तो राजश्री के होते हुए चांदनी और प्रतीक्षा का प्रवेश मेरी जिंदगी में होता ही नहीं. सच्चे प्यार की यहीं परिभाषा भी है. अगर राजश्री को कई सालों तक खोजने या उसकी शादी का समाचार प्राप्त होने पर अपने माता-पिता द्वारा चयनित लड़की को अपना प्यार देता. चांदनी और प्रतीक्षा जैसी और भी अनेकों लड़कियों को अपनी सच्ची दोस्त बनाकर अपने अंदर और समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने के लिए कुछ योगदान देता या प्रयास करता. आपके पात्र आकाश ने प्यार नहीं, प्यार को खिलवाड़ बनाया. सच्चा प्यार एक बार किया जाता है उसके बाद सिर्फ(मज़बूरी में) प्यार किया जाता है. सच्चा प्यार त्याग, तपस्या, समपर्ण भाव और बलिदान मांगता हैं. आप द्वारा किया सच्चा प्यार आपको सजा भी देता हैं. अगर विश्वास नहीं हो तो आप http://sach-ka-saamana.blogspot.com ,उपरोक्त ब्लॉग एक बार जरुर पढ़ें.

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  3. श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

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  4. क्या कहें अजब कशमकश है आपके इस प्रेम मे जो किसी का कभी बना ही नही वो कहां ये समझ सकता है कि प्रेम होता है क्या और वो करे क्या……………आपने तो अपनी ज़िन्दगी को ही खिलौना बना लिया।

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  5. आपके पात्र आकाश ने सच्चा प्यार नहीं किया. सच्चा प्यार एक बार किया जाता है. सच्चा प्यार त्याग, तपस्या, समपर्ण भाव और बलिदान मांगता हैं, ना की तू नहीं और सही और नहीं और सही... बस यही कह सकते हैं...

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  6. श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

    श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी कल ही लगाये है. इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.

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  7. @रमेश जी यदि आपकी जगह मैं होता तो भी शायद वही करता जो आपने कहा।
    @वंदना जी कहानी के नायक ने वास्‍तव में अपनी जिंदगी को खिलौना बना लिया।
    @संध्‍या जी आकाश ने सच्‍चा प्‍यार किया या नहीं ये आप कैसे कह सकती हैं.... हां उसने एक से ज्‍यादा से प्‍यार कर तू नहीं और सही.... के फलसफे को ज्‍यादा अपनाया.... उसकी सजा भी उसे मिली.....
    ..... पर अब सवाल है कि उसे क्‍या करना चाहिए....
    उसने गलत किया..... सही किया..... ये अलग बात है..... अब इस दुविधा की हालत में उसे क्‍या करना चाहिए....

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  8. आकाश जिसे प्यार समझता है वो प्यार नही एक आकर्षण मात्र है स्त्री देह के प्रति,विपरीत लिंग के प्रति.
    प्यार में देह का क्या काम ? बालों में कंघी तरह अंगुलियां फिर्वाना इस नायक कीछिछोरी हरकते हैं जिसे वो प्यार का नाम दे रहा है.ड्रेस की तरह प्रेमिकाएं बदलता है आर...सुख,शांति,सुकून चाहता है स्टुपिड!
    जो हुआ सो हुआ.आधिकांश पुरुष इसी मानसिकता वाले मिलेंगे.मौका मिलने पर प्यार के नाम पर.........
    अब उसे अपनी पहली प्रेमिका से शादी कर लेनी चाहिये.और आगे उसके प्रति वफादार रह कर जीवन बिताना चाहिये.भाभी,बहिन क्या सोचेगी ये सोच कर गलत फैसला नही करना चाहिये.एक बार वो अपनी आत्मा की आवाज सुने उसे जवाब मिल जायेगा.बेशक सब मिल जाए जीवन में सच्चा प्यार मिल जाए ...बहुत है.पर...नायक नायिका को ये नही भूलना चाहिये कि प्यार इश्वर का नाम है,प्यार जिम्मेदारियों का नाम है प्यार सामने वाले के सुख दुःख का ख्याल रखने का नाम है और .....सामने सिर्फ प्रेमिका या पत्नी ही तो नही न?

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  9. यदि मैं आपकी जगह होता तो राजश्री के पास जाता किन्तु सारी सच्ची बातें प्रतीक्षा और उसके घरवालों को बताकर | अपने परिजनों को भी सारी बातें बताता | राजश्री के साथ प्यार की पेंगें बढ़ाकर उसे भूला कौन ?

    अपने प्यार को वासना या स्वार्थ या छिछोरेपन का रूप किसने दिया ?........मैंने | इस फैसले से जहां राजश्री के साथ मेरे द्वारा किये गए विश्वासघात का ज़ख्म भरता वहीँ दूसरी ओर औरत को केवल मन बहलाने की चीज़ समझने वाले को अगर कुछ चोटें भी लगें तो सही ही होगा | आखिर गलती मुझसे हुई है तो पश्चाताप कौन करेगा |

    यह कौन सा प्यार हुआ भाई , कि एक को भूलकर दूसरी से ,दूसरी को छोड़ तीसरी से ......

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  10. @इंदुजी, आपका कहना वाजिब है। आकाश ने वास्‍तव में प्‍यार को खिलवाड की तरह लिया। सच में 'स्‍टुपिड' था वह। आपका बताया रास्‍ता ही उसके लिए अच्‍छा हो सकता है।
    @सुरेन्‍द्र जी आपसे सहमत।

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  11. @सुरेन्‍द्र सिंह " झंझट " और @इंदु पुरी गोस्वामी जी आपसे सहमत।

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  12. अच्छा सवाल खड़ा कर दिया यार , मै तो उलझ गया भाई ।
    कहते हैं पहला "प्यार" ही सच्चा होता है ,सो मै तो राजश्री के साथ हूं ।

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  13. Atul ji...Akash is a man of weak character...feeble man.he actually don't know how to love..?He is living in Infatuation...ussne kissi bhi ladki se pyar nahi kia...sirf attraction tha...He should apologize to Rajshree...and prateeksha...And should marry to Rajshree.And he should Improve his character...He must understand that...women are not for time pass...Women is a life force...

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  14. @सही है अमित जी।
    @ईरा जी कुछ रास्‍ता भी बता दें उसे

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  15. आकाश ने प्रेम का अपमान किया है अत: अब उसको ही इस समस्या का समाधान खोजना है , कहानी में ज्यादा मोड़ दे दिए आपने ...

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  16. अतुल जी आपकी कहानी के पात्र आकाश के अब ह्र्दय परिवर्तन का समय आ गया है...अब तक आकाश ने केवल उथला प्रेम किया था..शायद यही कारण था कि वह अब तक अंजाम से वंचित था...प्रतीक्षा ने उसे अपने घर वालों की नाराज़गी का अपेक्षित कारण बताया है उसे भी अब राजश्री की हक़ीक़त प्रतीक्षा को बता देनी चाहिये...सच्चा प्रेम छीनना नहीं वरन त्याग की परिभाषा सिखाता है...आकाश को अपना सम्पूर्ण सच उसे बता देना चाहिये...प्रतीक्षा राजश्री की बरसों की प्रतीक्षा को संभवतः पूरा सम्मान देगी.....

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  17. प्यार कुछ मागता नही कुछ देता है --असल में राजश्री ने ही प्यार किया था --और उसने भी राजश्री से !पर प्यार के बाद वासना दुसरे स्थान पर आती है--आगे के प्यार को मै वासना से जोडती हूँ या कहलो आकर्षण ..उसे यकीनन राजश्री के पास ही जाना चाहिए ...

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  18. @सुनील जी काफी भटकाव के बाद तो अब अनिर्णय की स्थिति आ गई है।
    @शोएब जी आपकी बातों से मैं भी सहमत हूं।
    @जाकिर भाई शुक्रिया।
    @आपने सच कहा दर्शन कौर जी। राजश्री ही होनी चाहिए उसकी मंजिल।

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  19. इंतजार करें, कुछ और नये कोण बनेंगे.

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  20. aakash ko ek baar raj sheree se milkar apne sare halaton v prateeksha ke bare me batana chahiye .Rajshree shayad prateeksha v aakash ke raste me ab nahi aana chahegi kyonki vo to us aakash se pyar kartee thi jo keval uska tha .

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  21. .jis ladki ne imandari se uska itne saal intejar kiya usi sed usey shadi karni chahiye....

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  22. कहानी के पात्र हमारे हाथ में हैं। हम उन्‍हें कैसा भी रूप दे सकते हैं। राजश्री का पत्र कहाँ से आ टपका इसका उल्‍लेख कहानी में नहीं है। वर्तमान वास्‍तविकताओं पर खरी नहीं उतरती है यह कहानी। क्‍योंकि राजश्री वर्तमान में मोबाइल की दुनिया में इतनी जल्‍दी खो नहीं सकती और खो गयी तो वापस आएगी नहीं, जब तक की उसका स्‍वयं का स्‍वार्थ नहीं होगा। जहाँ समझदारी मेच करती हो वहीं शादी करनी चाहिए, यह तो वास्‍तविकता है और कहानी में तो कुछ भी किया जा सकता है।

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  23. ohh, sach kahe to paayr hin nahin hein Aakash ke dil mein. Agar unko khud patha hein ki wo kisko sahi mein pyar karte hein to fir unse shadi ya pyar kare. per 1st khud ko mehesus hona jaruri hein.

    2nd step agar un dono ladki se kisi ek se shadi kare ya na kare, phirbhi pehele apne bare mein satya prakash kare wow dono family ko.

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  24. बहुत सुंदर ढंग से गुंथी हुई कहानी, बहुत दिनों के बाद आज कोई कहानी पढ़ी है. बहुत सुंदर भावपूर्ण कहानी है. जो भुगते वही जाने या यों कहें की जिस गली जाना नहीं उसका रास्ता क्या पूछना ? ये आपकी आप बीती है या कहानी है ये आप जाने, जवाब मैं नहीं दे सकता आपके सवाल का. लेकिन निसंदेह ये एक बहुत सुंदर भावपूर्ण कहानी है.

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