13 जनवरी 2013

राष्ट्रीय शर्म है यह!!!

इसे इस देश का दुर्भाग्य कहें या फिर देश में राज करने वाले सत्ताधीशों की नपुंसकता कि किसी समय हमारी दी हुई रोटी पर अपना वर्तमान और भविष्य गढऩे वाला एक पिद्दी सा देश हम पर लगातार हमले करता रहा है और हमारे हुक्मरान सिर्फ बातें ही कर रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि वह कमीना देश हमारी सीमा पर घुसकर हमारे एक जवान का सिर काटकर अपने साथ ले जाता है, जश्र मनाता रहता है और हमारे मंत्री कोई जवाबी कार्रवाई न करने की बात करते रहते हैं। शर्म से डूब मरने का वक्त है नेताओं केे लिए कि जिस जवान का सिर पाकिस्तानी ले गए हैं, उसके परिजन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय सीमा में गोलीबारी करता रहा है। करगिल युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम का समझौता हुआ है, लेकिन पाकिस्तान इसका उल्लंघन किए जा रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ रिश्ते निभाने की कवायद हर स्तर पर हो रही है। पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी देश में बुलाए जा रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि खेल के माध्यम से दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी आएगी। पाकिस्तानी हॉॅकी खिलाडिय़ों को आमंत्रित किया जा रहा है। पाकिस्तानी कलाकारों को भारतीय टीवी चैनलों में आमंत्रित किया जा रहा है। फिल्मों में काम दिया जा रहा है। पाकिस्तान के नेताओं से गले मिलने का काम किया जा रहा है, लेकिन जो गद्दार है, वह गद्दार रहेगा की तर्ज पर पाकिस्तान हर बार पीठ में छुरा भोंकने का काम कर रहा है। ऐसे में ऐसे देश के साथ किसी भी तरह के रिश्ते की बात करना न सिर्फ बेवकूफी है, बल्कि देशहित में नहीं है।
पाकिस्तान लगातार भारतीय सैनिकों को उकसाने का काम कर रहा है। हमारे सैनिकों ने यदि उसका जवाब दिया तो वही होगा, जो पहले हो चुका है। 1962, 1971 और 1991 का युद्ध पाकिस्तान को नहीं भूलना चाहिए। उसके घर में घुसकर मारा गया था उसे। सत्ता में काबिज लोगों की कमजोरी सैनिकों को भारी पड़ रही है। सीमा पर गोलीबारी करने वाले दुस्साहसी पाकिस्तान ने पिछले दिनों भारत के क्षेत्र में घुसकर हमारे दो जवानों को मार डाला और दोनों के सिर काट डाले। अमानवीयता की हदें पार करते हुए उसने एक सैनिक का सिर्फ धड़ यहां छोड़ा और सिर अपने साथ ले गया। दो सैनिकों की इस तरह धोखे से की गई हत्या के मामले में पूरा देश उबल रहा है लेकिन राजनीतिक स्तर पर अभी तक पाकिस्तान के खिलाफ किसी तरह के कठोर कदम की बात सत्ता में बैठे लोगों ने नहीं की है। उल्टे देश के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद यह एलान करते हैं कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ किसी तरह की इंतकामी कार्रवाई नहीं करेगा। दूसरी ओर अपने दुश्मनों को उसी के देश  में घुसकर मारने वाले अमेरिका ने भारत को सब्र से काम लेने की सलाह दी है। अमेरिका लगातार पाकिस्तान पर ड्रोन हमले कर रहा है और दूसरी ओर भारत को शांति की नसीहत दे रहा है।
हमारे हुक्मरानों को अमेरिका के मुफ्त की सलाह और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का ख्याल रखने के पहले अपने देश की भावनाओं को समझना चाहिए। पूरा देश चाह रहा है कि पाकिस्तान को उसके किए की सजा मिलनी चाहिए और उसे कड़ा जवाब मिलना चाहिए।
इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि हमारे देश की सरहद में शहीद हुए एक जवान के परिजन अपने बेटे की शहादत को सम्मान दिए जाने, उसके आधे शरीर (सिर) को मांगने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ जाएं और इस पर सरकारी स्तर पर कोई बात न की जाए। हम कहते हैं कि पाकिस्तान पर फिलहाल जवाबी कार्रवाई न करने का बयान देने वाले नेताओं ने क्या पाकिस्तान से यह बात की है कि उसके सैनिक का कटा हुआ सिर वापस किया जाए। सैनिकों के परिजनों का भूख हड़ताल पर बैठना सिर्फ एक घटना नहीं, राष्ट्रीय शर्म का विषय है।

8 टिप्‍पणियां:

  1. सच में दुखद और शर्मनाक है ......

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  2. शर्म आये किसी को तब न ! बढ़िया प्रस्तुति ! मकर संक्राति की मंगलमय कामनाये !

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  3. हमारे हुक्मरानों को अमेरिका के मुफ्त की सलाह और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का ख्याल रखने के पहले अपने देश की भावनाओं को समझना चाहिए। पूरा देश चाह रहा है कि पाकिस्तान को उसके किए की सजा मिलनी चाहिए और उसे कड़ा जवाब मिलना चाहिए।


    सहमत हूं आपकी बात से, अब कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है..

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  4. सरकार को शांति समझौते की बाते एक तरफ रख इन्हें सबक सिखाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा जैसे इंदिरा जी ने किया था .और साथ ही ये भूख हड़ताल बेकार की बात है एक वीर सैनिक के घर के लोगों का ये करना शोभा नहीं देता .सार्थक अभिव्यक्ति ”ऐसी पढ़ी लिखी से तो लड़कियां अनपढ़ ही अच्छी .”
    @ट्वीटर कमाल खान :अफज़ल गुरु के अपराध का दंड जानें .

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 15/1/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है

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  6. सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    मकरसंक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  7. य‍ह ऐतिहासिक सत्‍य है कि पाकिस्‍तान भारत को पाकिस्‍तान बनाना चाहता है और उसे भारत के कट्टरपंथियों का भी समर्थन प्राप्‍त है लेकिन हमारी सरकार कुछ करने में असमर्थ बनी हुई है।

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