उत्तर प्रदेश में एक डीएसपी शहीद हुए हैं। ये कहें कि राजनीति का शिकार हुए हैं। उनकी हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता रघुराज सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। दूसरी ओर एक शिंकजा कसता जा रहा है, उत्तरप्रदेश सरकार पर। यह शिकंजा कस रही हैं, शहीद डीएसपी जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद। परवीन आजाद के पति शहीद हुए हैं। उनके पति की शहादत का पूरा सम्मान करते हुए परवीन आजाद के प्रति संवेदना व्यक्त की जा सकती है लेकिन वे जिस तरह से बर्ताव कर रही हैं, जिस तरह से एक एक कर सरकार से अपनी मांगे मनवाने की जिद कर रही हैं, उससे लगने लगा है कि उनके पति की शहादत के बाद उनकी कोई बंपर लाटरी निकल आई हो! यह स्थिति ठीक नहीं है।
उत्तर प्रदेश के कुंडा के डीएसपी जियाउल हक की पिछले हफ्ते हत्या कर दी गई थी। इस कांड में वहां के ताकतवर मंत्री रघुराज प्रताप सिंह यानि राजा भैया का नाम सामने आया। हंगामा मचने के बाद राजा भैया को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। दूसरी ओर डीएसपी मर्डर कांड की जांच सीबीआई से कराई जा रही है। उधर अपने पति की शहादत के बाद डीएसपी की पत्नी परवीन आजाद ने जिस तरह से उत्तरप्रदेश सरकार के सामने अपनी मांगों की फेहरिश्त जारी करनी शुरू कर दी है, उसने न सिर्फ विवाद खड़ा कर दिया है, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। कुंडा के डीएसपी जियाउल हक एक इमानदारी पुलिस अधिकारी माने जाते थे और उनकी हत्या की मुख्य वजह भी यही बताई जा रही है लेकिन उनकी पत्नी ने जिस तरह से शहादत के बाद की प्रक्रिया को अपनी मांगोंं से विवादास्पद बनाने का काम किया है, वह न सिर्फ गैरवाजिब लगता है बल्कि यह शहादत के अपमान की तरह भी है।
अव्वल तो डीएसपी की शहादत के बाद उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से पीडि़त परिवार के पांच सदस्यों को नौकरी देने की घोषणा के परिप्रेक्ष्य में परवीन आजाद ने नौकरी के लिए जो नाम दिए, विवाद वहीं से शुरू हुआ। परवीन ने अपने मायके पक्ष के लोगों के नाम नौकरी के लिए दे दिए जबकि डीएसपी के पिता ने इसका विरोध किया और यह कहा कि बेटा उनका खोया है तो यह अधिकार उनका बनता है। इस पर विवाद थमा नहीं था कि परवीन आजाद ने उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा उनको योग्यता के आधार पर दी गई नौकरी को यह कहकर ठुकराने का काम किया कि उनको डीएसपी से नीचे का पद मंजूर नहीं है।
अब परवीन आजाद ने पांच मांगे और सामने रख दी हैं। यूपी सरकार को अपनी 5 मांगों का खत सौंप परवीन ने कहा है कि हत्याकांड की सीबीआई जांच करने वाले अधिकारी दिल्ली के हों न कि लखनऊ में, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। दूसरी मांग ये की गई है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर रोजाना की जाए। तीसरी मांग ये है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट यूपी के बाहर हो। चौथी मांग ये है कि जो भी सबूत मिलें या मौजूद हैं वो सीधे कोर्ट तक पहुंचें। आखिरी मांग में डीएसपी जियाउल हक की पत्नी ने कहा है कि जांच की जानकारी उन्हें भी दी जाए। इन मांगों को लेकर सीबीआई पशोपेश में है।
डीएसपी की शहादत वास्तव में उनके परिवार के लिए बड़ी क्षति है। खासकर उनकी पत्नी के लिए, लेकिन उनकी पत्नी को अपने पति की शहादत का सम्मान करना चाहिए, न कि अपनी मांगों और बातों से ऐसा कुछ करना चाहिए कि जिससे शहादत का अपमान हो।
उत्तर प्रदेश के कुंडा के डीएसपी जियाउल हक की पिछले हफ्ते हत्या कर दी गई थी। इस कांड में वहां के ताकतवर मंत्री रघुराज प्रताप सिंह यानि राजा भैया का नाम सामने आया। हंगामा मचने के बाद राजा भैया को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। दूसरी ओर डीएसपी मर्डर कांड की जांच सीबीआई से कराई जा रही है। उधर अपने पति की शहादत के बाद डीएसपी की पत्नी परवीन आजाद ने जिस तरह से उत्तरप्रदेश सरकार के सामने अपनी मांगों की फेहरिश्त जारी करनी शुरू कर दी है, उसने न सिर्फ विवाद खड़ा कर दिया है, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। कुंडा के डीएसपी जियाउल हक एक इमानदारी पुलिस अधिकारी माने जाते थे और उनकी हत्या की मुख्य वजह भी यही बताई जा रही है लेकिन उनकी पत्नी ने जिस तरह से शहादत के बाद की प्रक्रिया को अपनी मांगोंं से विवादास्पद बनाने का काम किया है, वह न सिर्फ गैरवाजिब लगता है बल्कि यह शहादत के अपमान की तरह भी है।
अव्वल तो डीएसपी की शहादत के बाद उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से पीडि़त परिवार के पांच सदस्यों को नौकरी देने की घोषणा के परिप्रेक्ष्य में परवीन आजाद ने नौकरी के लिए जो नाम दिए, विवाद वहीं से शुरू हुआ। परवीन ने अपने मायके पक्ष के लोगों के नाम नौकरी के लिए दे दिए जबकि डीएसपी के पिता ने इसका विरोध किया और यह कहा कि बेटा उनका खोया है तो यह अधिकार उनका बनता है। इस पर विवाद थमा नहीं था कि परवीन आजाद ने उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा उनको योग्यता के आधार पर दी गई नौकरी को यह कहकर ठुकराने का काम किया कि उनको डीएसपी से नीचे का पद मंजूर नहीं है।
अब परवीन आजाद ने पांच मांगे और सामने रख दी हैं। यूपी सरकार को अपनी 5 मांगों का खत सौंप परवीन ने कहा है कि हत्याकांड की सीबीआई जांच करने वाले अधिकारी दिल्ली के हों न कि लखनऊ में, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। दूसरी मांग ये की गई है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर रोजाना की जाए। तीसरी मांग ये है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट यूपी के बाहर हो। चौथी मांग ये है कि जो भी सबूत मिलें या मौजूद हैं वो सीधे कोर्ट तक पहुंचें। आखिरी मांग में डीएसपी जियाउल हक की पत्नी ने कहा है कि जांच की जानकारी उन्हें भी दी जाए। इन मांगों को लेकर सीबीआई पशोपेश में है।
डीएसपी की शहादत वास्तव में उनके परिवार के लिए बड़ी क्षति है। खासकर उनकी पत्नी के लिए, लेकिन उनकी पत्नी को अपने पति की शहादत का सम्मान करना चाहिए, न कि अपनी मांगों और बातों से ऐसा कुछ करना चाहिए कि जिससे शहादत का अपमान हो।















